Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 801

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता꣡ हि शश्व꣢꣯न्त꣣ ई꣡ड꣢त इ꣣त्था꣡ विप्रा꣢꣯स ऊ꣣त꣡ये꣢ । स꣣बा꣢धो꣣ वा꣡ज꣢सातये ॥८०१॥

ताः । हि । श꣡श्व꣢꣯न्तः । ई꣡ड꣢꣯ते । इ꣣त्था꣢ । वि꣡प्रा꣢꣯सः । वि । प्रा꣣सः । ऊत꣡ये꣢ । स꣣बा꣡धः꣢ । स꣣ । बा꣡धः꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯सातये । वा꣡ज꣢꣯ । सा꣣तये ॥८०१॥

Mantra without Swara
ता हि शश्वन्त ईडत इत्था विप्रास ऊतये । सबाधो वाजसातये ॥

ताः । हि । शश्वन्तः । ईडते । इत्था । विप्रासः । वि । प्रासः । ऊतये । सबाधः । स । बाधः । वाजसातये । वाज । सातये ॥८०१॥

Samveda - Mantra Number : 801
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इत्था) सचमुच “इत्था सत्यनाम” [निघं॰ ३.१०] (शश्वन्तः-विप्रासः) बहुत विप्र—मेधावी विद्वान् (ऊतये) रक्षा के लिए (ता हि ईडते) उन ऐश्वर्यवान् और अग्रणायक परमात्मा को ही स्तुत करते हैं (वाजसातये) अमृत अन्नभोग प्राप्ति के लिए (सबाधः) समान बाध पीड़ा वाले होकर।
Essence
यह सत्य है कि उपासकजन एक साथ बाधा पीड़ा या संकट आ जाने पर सब दशा में परमात्मा की शरण लेते हैं॥२॥
Special