Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 795

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
व꣡रु꣢णः प्रावि꣣ता꣡ भु꣢वन्मि꣣त्रो꣡ विश्वा꣢꣯भिरू꣣ति꣡भिः꣢ । क꣡र꣢तां नः सु꣣रा꣡ध꣢सः ॥७९५॥

व꣡रु꣢꣯णः । प्रा꣣विता꣢ । प्र꣣ । अविता꣢ । भु꣣वत् । मित्रः꣢ । मि꣢ । त्रः꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯भिः । ऊ꣣ति꣡भिः꣢ । क꣡र꣢꣯ताम् । नः꣣ । सु꣡राध꣢सः । सु꣣ । रा꣡ध꣢꣯सः ॥७९५॥

Mantra without Swara
वरुणः प्राविता भुवन्मित्रो विश्वाभिरूतिभिः । करतां नः सुराधसः ॥

वरुणः । प्राविता । प्र । अविता । भुवत् । मित्रः । मि । त्रः । विश्वाभिः । ऊतिभिः । करताम् । नः । सुराधसः । सु । राधसः ॥७९५॥

Samveda - Mantra Number : 795
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वरुणः-मित्रः) मोक्षकर्मभोगार्थ वरने वाला तथा संसार में कर्मकरणार्थ प्रेरित करने वाला परमात्मा (विश्वाभिः-ऊतिभिः) समस्त रक्षणविधियों द्वारा (अविता प्रभुवत्) रक्षक प्रभूत है—रक्षक होने में समर्थ है (नः सुराधसः करताम्) हमें शोभन धन वाले—शोभनसिद्धि वाले कर दे।
Essence
मित्ररूप वरुणरूप परमात्मा समस्त रक्षाविधियों से रक्षक होने में समर्थ है। हमें शोभन धन वाले और शोभन सिद्धि वाले कर देता है, जब कि हम उसके उपासक हो जावें॥३॥
Special