Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 789

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣡ नः꣢ पुना꣣न꣡ आ भ꣢꣯र र꣣यिं꣢ वी꣣र꣡व꣢ती꣣मि꣡ष꣢म् । ई꣡शा꣢नः सोम वि꣣श्व꣡तः꣢ ॥७८९॥

सः꣢ । नः꣣ । पुनानः꣢ । आ । भ꣣र । रयि꣢म् । वी꣣र꣡व꣢तीम् । इ꣢ष꣢꣯म् । ई꣡शा꣢꣯नः । सो꣣म । विश्व꣡तः꣢ ॥७८९॥

Mantra without Swara
स नः पुनान आ भर रयिं वीरवतीमिषम् । ईशानः सोम विश्वतः ॥

सः । नः । पुनानः । आ । भर । रयिम् । वीरवतीम् । इषम् । ईशानः । सोम । विश्वतः ॥७८९॥

Samveda - Mantra Number : 789
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! (सः) वह तू (पुनानः) शान्तरूप प्राप्त होता हुआ (नः) हमारे लिए (रयिम्) मोक्षैश्वर्यरूप धन को और (वीरवतीम्-इषम्) बलवती इस लोकस्थिति को “अयं वै लोक इषमिति” [ऐ॰ ६.७] (आ भर) आभरित कर दे (विश्वतः-ईशानः) तू विश्व का स्वामी है।
Essence
हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू विश्व का स्वामी है अपनी आनन्दधारा में प्राप्त होता हुआ हमारे लिए मोक्षैश्वर्य को और इस लोक गुणवती स्थिति को आभरित कर दे॥३॥
Special