Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 780

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
या꣡ ते꣢ भी꣣मा꣡न्यायु꣢꣯धा ति꣣ग्मा꣢नि꣣ स꣢न्ति꣣ धू꣡र्व꣢णे । र꣡क्षा꣢ समस्य नो नि꣣दः꣢ ॥७८०॥

या । ते꣣ । भीमा꣡नि꣢ । आ꣡यु꣢꣯धा । ति꣣ग्मा꣡नि꣢ । स꣡न्ति꣢꣯ । धू꣡र्व꣢꣯णे । र꣡क्ष꣢꣯ । स꣣मस्य । नः । निदः꣢ ॥७८०॥

Mantra without Swara
या ते भीमान्यायुधा तिग्मानि सन्ति धूर्वणे । रक्षा समस्य नो निदः ॥

या । ते । भीमानि । आयुधा । तिग्मानि । सन्ति । धूर्वणे । रक्ष । समस्य । नः । निदः ॥७८०॥

Samveda - Mantra Number : 780
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(धूर्वणे) हे धूर्वणि! काम आदि शत्रुओं के नाशक (ते) तेरे (या) जो (भीमानि) भयङ्कर (तिग्मानि) तीक्ष्ण (आयुधा) उपदेश शस्त्र (सन्ति) हैं (समस्य निदः) समस्त निन्दक के दबाव से (नः-रक्षा) हमारी रक्षा कर।
Essence
हे शान्तस्वरूप काम आदि के विनाशक परमात्मन्! तेरे जो भयङ्कर तीक्ष्ण उपदेशास्त्र हैं उनसे समस्त काम आदि के दबाव से हमारी रक्षा कर॥३॥
Special