Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 77

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वत्सप्रिर्भालन्दनः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡ होता꣢꣯ जा꣣तो꣢ म꣣हा꣡न्न꣢भो꣣वि꣢न्नृ꣣ष꣡द्मा꣢ सीदद꣣पां꣡ वि꣢व꣣र्ते꣢ । द꣢ध꣣द्यो꣢ धा꣣यी꣢ सु꣣ते꣡ वया꣢꣯ꣳसि य꣣न्ता꣡ वसू꣢꣯नि विध꣣ते꣡ त꣢नू꣣पाः꣢ ॥७७॥

प्र꣢ । हो꣡ता꣢꣯ । जा꣣तः꣢ । म꣣हा꣢न् । न꣣भोवि꣢त् । न꣣भः । वि꣢त् । नृ꣣ष꣡द्मा꣢ । नृ꣣ । स꣡द्मा꣢꣯ । सी꣣दत् । अपा꣢म् । वि꣣वर्ते꣢ । वि꣣ । वर्त्ते꣢ । द꣡ध꣢꣯त् । यः । धा꣣यी꣢ । सु꣣ते꣢ । व꣡याँ꣢꣯सि । य꣣न्ता꣢ । व꣡सू꣢꣯नि । वि꣣धते꣢ । त꣣नूपाः꣢ । त꣣नू । पाः꣢ ॥७७॥

Mantra without Swara
प्र होता जातो महान्नभोविन्नृषद्मा सीददपां विवर्ते । दधद्यो धायी सुते वयाꣳसि यन्ता वसूनि विधते तनूपाः ॥

प्र । होता । जातः । महान् । नभोवित् । नभः । वित् । नृषद्मा । नृ । सद्मा । सीदत् । अपाम् । विवर्ते । वि । वर्त्ते । दधत् । यः । धायी । सुते । वयाँसि । यन्ता । वसूनि । विधते । तनूपाः । तनू । पाः ॥७७॥

Samveda - Mantra Number : 77
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 8;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(महान् होता जातः) महान् स्वीकारकर्ता—अपनाने वाला प्रसिद्ध (नृषद्मा) मनुष्यों में विराजमान (नभोवित्) उनके हृदयाकाश को प्राप्त (अपां विवर्तेन) प्राणों के विवर्तन से गमनागमन संस्थान को “आपो वै प्राणाः” [श॰ ४.८.२.२] (प्रसीदत्) जीवन प्रसाद देता है (यः-दधत्) जो उन प्राणों को धारण करता हुआ (धायी) तेरा धाता—ध्याता (ते विधते) तुझ आत्मसमर्पण करते हुए के लिये (वयांसि) अन्न ज्ञान जीवनों को (वसूनि) वास भोगों का (सु-यन्ता) सुदाता (तनूपाः) तेरे शरीर का रक्षक परमात्मा है।
Essence
परमात्मा अत्यन्त अपनाने वाला हृदयाकाश को प्राप्त हुआ मनुष्य में रहकर प्राणसंस्थान में जीवनप्रसाद देता है और प्राणों का धारक है वह सब प्रकार के अन्न ज्ञान जीवनबलों का तथा वास भोगधनों का अच्छा दाता है॥५॥
Special
ऋषिः—वत्सप्रिः (अपने को परमात्मा का प्रेमपात्र बनाने वाला उपासक)॥