Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 761

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣡प꣢ शिक्षापत꣣स्थु꣡षो꣢ भि꣣य꣢स꣣मा꣡ धे꣢हि꣣ श꣡त्र꣢वे । प꣡व꣢मान वि꣣दा꣢ र꣣यि꣢म् ॥७६१॥

उ꣡प꣢꣯ । शि꣣क्ष । अपतस्थु꣡षः꣢ । अ꣣प । तस्थु꣡षः꣢ । भि꣣य꣡स꣢म् । आ । धे꣣हि । श꣡त्र꣢꣯वे । प꣡व꣢꣯मान । वि꣣दाः꣢ । र꣣यि꣢म् ॥७६१॥

Mantra without Swara
उप शिक्षापतस्थुषो भियसमा धेहि शत्रवे । पवमान विदा रयिम् ॥

उप । शिक्ष । अपतस्थुषः । अप । तस्थुषः । भियसम् । आ । धेहि । शत्रवे । पवमान । विदाः । रयिम् ॥७६१॥

Samveda - Mantra Number : 761
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) हे आनन्दधारा में आने वाले परमात्मन्! तू (अपतस्थुषः) मेरे अन्दर अन्यथा स्थित दोषों के प्रति (उपशिक्ष) (शत्रवे भियसम्-आधेहि) मेरे अन्तःस्थल को नष्ट करने वाले काम आदि शत्रु के लिए मेरे अन्दर भय बिठा (रयिं विदा) अपना स्वरूपैश्वर्य अनुभव करा।
Essence
आनन्दधारा में आनेवाला परमात्मा उपासक के अन्दर अन्यथा स्थित दोषों के प्रति घृणा कराता है काम आदि शत्रु सदृश भावों के प्रति भय दिलाता है और अपने स्वरूपैश्वर्य का अनुभव कराता है॥१॥
Special
ऋषिः—असितो देवलो वा (कामबन्धन से रहित या परमात्मदेव को जीवन में लाने धारण करने वाला उपासक)॥ देवता—सोमः (शान्तस्वरूप परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥