Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 758

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ प्र꣣त्ने꣢न꣣ ज꣡न्म꣢ना दे꣣वो꣢ दे꣣वे꣡भ्यः꣢ सु꣣तः꣢ । ह꣡रि꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢ अर्षति ॥७५८॥

ए꣣षः꣢ । प्र꣣त्ने꣡न꣢ । ज꣡न्म꣢꣯ना । दे꣣वः꣢ । दे꣣वे꣡भ्यः꣢ । सु꣣तः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣣वि꣡त्रे꣢ । अ꣣र्षति ॥७५८॥

Mantra without Swara
एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः । हरि पवित्रे अर्षति ॥

एषः । प्रत्नेन । जन्मना । देवः । देवेभ्यः । सुतः । हरिः । पवित्रे । अर्षति ॥७५८॥

Samveda - Mantra Number : 758
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(एषः-हरिः-देवः) यह दुःखापहरणकर्ता सुखाहरणकर्ता सोम—शान्तस्वरूप परमात्मदेव “भद्रः सोमः पवमानो वृषा हरिः” [काठक॰ ६.३] (प्रत्नेन जन्मना) पुरातन—शाश्वत प्रसिद्धि से (देवेभ्यः) जीवन्मुक्तों के ‘विभक्ति व्यापयेन’ (पवित्रे सुतः अर्षति) हृदयाकाश में साक्षात् होता है प्राप्त होता है।
Essence
दुःखापहरणकर्ता सुखाहरणकर्ता परमात्मा शाश्वत प्रसिद्धि से जीवन्मुक्तों के हृदयाकाश में साक्षात् होकर प्राप्त है॥१॥
Special
ऋषिः—आजीगर्तः शुनःशेपः (इन्द्रिय भोगों की दौड़ में शरीरगर्त में गिरा उत्थान का इच्छुक)॥ देवता—सोमः (शान्तस्वरूप परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥