Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 756

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣य꣡ꣳ सूर्य꣢꣯ इवोप꣣दृ꣢ग꣣य꣡ꣳ सरा꣢꣯ꣳसि धावति । स꣣प्त꣢ प्र꣣व꣢त꣣ आ꣡ दिव꣢꣯म् ॥७५६॥

अ꣣य꣢म् । सू꣡र्यः꣢꣯ । इ꣣व । उपदृ꣢क् । उ꣣प । दृ꣢क् । अ꣣य꣢म् । स꣡रा꣢꣯ꣳसि । धा꣣वति । स꣣प्त꣢ । प्र꣣व꣡तः꣢ । आ । दि꣡व꣢꣯म् ॥७५६॥

Mantra without Swara
अयꣳ सूर्य इवोपदृगयꣳ सराꣳसि धावति । सप्त प्रवत आ दिवम् ॥

अयम् । सूर्यः । इव । उपदृक् । उप । दृक् । अयम् । सराꣳसि । धावति । सप्त । प्रवतः । आ । दिवम् ॥७५६॥

Samveda - Mantra Number : 756
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अयम्) यह ज्ञानप्रकाशस्वरूप परमात्मा (सूर्यः-इव-उपदृक्) सूर्य के समान स्पष्ट प्रकाशक है—साक्षात् प्रकाशमान है उपासकों के सम्मुख या हृदय में (अयम्) यह परमात्मा (सरांसि धावति) उपासकों के प्रार्थनावचनों को “सरः-वाङ् नाम” [निघं॰ १.११] प्राप्त होता है “धावति गतिकर्मा” [निघं॰ २.१४] (सप्त प्रवतः-आ दिवम्) परिचरणशील—उपासनाशील “सपति परिचरणकर्मा” [निघं॰ ३.५] नम्र स्तुतिकर्ताओं को अमृतधाम—मोक्ष तक पहुँचाता है।
Essence
प्रकाशस्वरूप परमात्मा उपासकों के प्रति सूर्य के समान साक्षात् प्रकाशमान होता है उनके प्रार्थनावचनों को स्वीकार करता है तथा हृदय में नम्र स्तुति करने वाले उन उपासकों को मोक्षधाम तक पहुँचाता है अपनाता है॥२॥
Special

देवता—पवमानः सोमः (शान्तस्वरूप परमात्मा)॥