Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 747

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नारदः काण्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
स꣡ प्र꣢थ꣣मे꣡ व्यो꣢मनि दे꣣वा꣢ना꣣ꣳ स꣡द꣢ने वृ꣣धः꣢ । सु꣣पारः꣢ सु꣣श्र꣡व꣢स्तमः꣣ स꣡म꣢प्सु꣣जि꣢त् ॥७४७॥

सः । प्र꣣थमे꣢ । व्यो꣡म꣢नि । वि । ओ꣣मनि । दे꣣वा꣡ना꣢म् । स꣡द꣢꣯ने । वृ꣢धः꣡ । सु꣣पा꣢रः । सु꣣ । पारः꣡ । सु꣣श्र꣡व꣢स्तमः । सु꣣ । श्र꣡व꣢꣯स्तमः । सम् । अ꣣प्सुजि꣣त् । अ꣣प्सु । जि꣢त् ॥७४७॥

Mantra without Swara
स प्रथमे व्योमनि देवानाꣳ सदने वृधः । सुपारः सुश्रवस्तमः समप्सुजित् ॥

सः । प्रथमे । व्योमनि । वि । ओमनि । देवानाम् । सदने । वृधः । सुपारः । सु । पारः । सुश्रवस्तमः । सु । श्रवस्तमः । सम् । अप्सुजित् । अप्सु । जित् ॥७४७॥

Samveda - Mantra Number : 747
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 2; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सः-प्रथमे) वह परमात्मा प्रमुख (देवानां सदने व्योमनि) मुक्तों के स्थान विशेष रक्षण स्थान मोक्षरूप में (वृधः) जो उपासकों का वर्धक (सुपारः) संसार सागर से शोभन पारकर्ता (सुश्रवस्तमः) शोभन यशोजीवन का अत्यन्त निमित्त (सम्-अप्सुजित्) हृदयावकाश में कामादि का सम्यक् नाशक उपासनीय है “आपो वै सर्वे कामाः” [श॰ १०.५.४१५]।
Essence
मुक्तों के सदन विशेष रक्षण स्थान प्रमुख मोक्षधाम में आनन्द वर्धक संसार से पारकर्ता अच्छे यश का निमित्त हृदय के कामादि का नाशक परमात्मा उपासनीय है॥२॥
Special