Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 684

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- पादनिचृत् (गायत्री) Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣भी꣢꣫ षु णः꣣ स꣡खी꣢नामवि꣣ता꣡ ज꣢रितॄ꣣णा꣢म् । श꣣तं꣡ भ꣢वास्यू꣣त꣡ये꣢ ॥६८४॥

अ꣣भि꣢ । सु । नः꣣ । स꣡खी꣢꣯नाम् । स । खी꣣नाम् । अविता꣢ । ज꣣रितॄणा꣢म् । श꣣त꣢म् । भ꣣वासि । ऊत꣡ये꣢ ॥६८४॥

Mantra without Swara
अभी षु णः सखीनामविता जरितॄणाम् । शतं भवास्यूतये ॥

अभि । सु । नः । सखीनाम् । स । खीनाम् । अविता । जरितॄणाम् । शतम् । भवासि । ऊतये ॥६८४॥

Samveda - Mantra Number : 684
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(नः-जरितॄणाम् सखीनाम् अविता) हे इन्द्र ऐश्वर्यवान् परमात्मन्! तू हम स्तुतिकर्ता उपासक मित्रों का रक्षक है अतः उनकी (ऊतये) रक्षा के लिए (शतम्-अभि) आयु के प्रति—जब तक आयु है—आयुपर्यन्त “यच्छतमायुष्टत्” [जै॰ २.४७] ‘अभ्याप्तुम्’ प्राप्त करने को (सुभवासि) सुगम हो जा।
Essence
सबका रक्षक परमात्मा अपने मित्ररूप स्तुतिकर्ता जनों की ओर आयु भर झुका हुआ या प्राप्त होने को उद्यत रहता है उनकी रक्षा के लिये, परमात्मा की स्तुति करने वाले उसके मित्र हो जाते हैं वह उनकी आयु भर रक्षा करता है॥३॥
Special