Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 67

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
मू꣣र्धा꣡नं꣢ दि꣣वो꣡ अ꣢र꣣तिं꣡ पृ꣢थि꣣व्या꣡ वै꣢श्वान꣣र꣢मृ꣣त꣢꣫ आ जा꣣त꣢म꣣ग्नि꣢म् । क꣣वि꣢ꣳ स꣣म्रा꣢ज꣣म꣡ति꣢थिं꣣ ज꣡ना꣢नामा꣣स꣢न्नः꣣ पा꣡त्रं꣢ जनयन्त दे꣣वाः꣢ ॥६७॥

मू꣣र्धान꣢म् । दि꣣वः꣢ । अ꣣रति꣢म् । पृ꣣थिव्याः꣢ । वै꣣श्वानर꣢म् । वै꣣श्व । नर꣢म् । ऋ꣣ते꣢ । आ । जा꣣त꣢म् । अ꣣ग्नि꣢म् । क꣣वि꣢म् । स꣣म्रा꣡ज꣢म् । स꣣म् । रा꣡ज꣢꣯म् । अ꣡ति꣢꣯थिम् । ज꣡ना꣢꣯नाम् । आ꣣स꣢न् । नः꣣ । पा꣡त्र꣢꣯म् । ज꣣नयन्त । देवाः꣢ ॥६७॥

Mantra without Swara
मूर्धानं दिवो अरतिं पृथिव्या वैश्वानरमृत आ जातमग्निम् । कविꣳ सम्राजमतिथिं जनानामासन्नः पात्रं जनयन्त देवाः ॥

मूर्धानम् । दिवः । अरतिम् । पृथिव्याः । वैश्वानरम् । वैश्व । नरम् । ऋते । आ । जातम् । अग्निम् । कविम् । सम्राजम् । सम् । राजम् । अतिथिम् । जनानाम् । आसन् । नः । पात्रम् । जनयन्त । देवाः ॥६७॥

Samveda - Mantra Number : 67
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 7;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(दिवः—मूर्धानम्) द्युलोक के मूर्धारूप को—द्युलोक से भी परे वर्तमान को (पृथिव्याः-अरतिम्) पृथिवीलोक के स्तर—निम्नरूप—पृथिवी के भी अवर वर्तमान को (कविं सम्राजम्) क्रान्तदर्शी सम्यक् सर्वत्र राजमान—(जनानाम्-अतिथिम्) जन्यमान प्राणीमात्र के सत्करणीय—(नः-आसन्-पात्रम्) हमारे प्रमुख पूजापात्र (ऋत-आजातम्) अध्यात्म यज्ञ में प्रसिद्ध होने वाले (वैश्वानरम्-अग्निम्) विश्वनायक परमात्मा को (देवाः-जनयन्त) ध्यानी मुमुक्षुजन अपने अन्दर प्रसिद्ध करते हैं—साक्षात् करते हैं।
Essence
परमात्मा द्युलोक के ऊपर और उसके सम्भालने वाला है तथा पृथिवीलोक निम्नस्तर और उसके भी सम्भालने वाला विश्वनायक है वह सर्वज्ञ विश्व का सम्राट् मनुष्यों का सत्करणीय अतिथि और पूजा का प्रमुख पात्र है उसे ध्यान यज्ञ में मुमुक्षुजन साक्षात् करते हैं॥५॥
Footnote
[*10. “वाजयति-अर्चतिकर्मा” (निघं॰ ३.१४)।]
Special
ऋषिः—भारद्वाजः (परमात्मा के अर्चनबल को धारण करने में कुशल उपासक*10)॥