Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 664

1875 Mantra
Devata- मित्रावरुणौ Rishi- विश्वामित्रो गाथिनो जमदग्निर्वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उ꣣रुश꣡ꣳसा꣢ नमो꣣वृ꣡धा꣢ म꣣ह्ना꣡ दक्ष꣢꣯स्य राजथः । द्रा꣣घि꣢ष्ठाभिः शुचिव्रता ॥६६४॥

उ꣣रुश꣡ꣳसा꣢ । उ꣣रु । श꣡ꣳसा꣢꣯ । न꣣मोवृ꣡धा꣢ । न꣣मः । वृ꣡धा꣢꣯ । म꣣हा꣢ । द꣡क्षस्य꣢꣯ । रा꣣जथः । द्रा꣡घि꣢꣫ष्ठाभिः । शुचिव्रता । शुचि । व्रता ॥६६४॥

Mantra without Swara
उरुशꣳसा नमोवृधा मह्ना दक्षस्य राजथः । द्राघिष्ठाभिः शुचिव्रता ॥

उरुशꣳसा । उरु । शꣳसा । नमोवृधा । नमः । वृधा । महा । दक्षस्य । राजथः । द्राघिष्ठाभिः । शुचिव्रता । शुचि । व्रता ॥६६४॥

Samveda - Mantra Number : 664
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(उरुशंसा) हे अति प्रशंसनीय (नमोवृधा) स्तुतियों द्वारा मुक्त उपासक को बढ़ाने वाले (मह्ना) महान् (शुचिव्रता) पवित्र कर्म करने वाले मित्रावरुणस्वरूप परमात्मन् (द्राघिष्ठाभिः) तू दीर्घ काल की स्तुतियों द्वारा (दक्षस्य राजथः) मेरे आत्मस्वरूप को प्रकाशित कर रहा है।
Essence
परमात्मन्! तू अति प्रशंसनीय है पवित्रकारी महती पूर्व से चली आई स्तुतियों से मुझ उपासक के आत्मबल पर अधिकार किये रक्षा कर रहा है॥१॥
Special