Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 650

1875 Mantra
Devata- लिङ्गोक्ताः Rishi- प्रजापतिः Chhand- पदपङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
ए꣣वा꣢ह्येऽ३ऽ३ऽ३व꣡ । ए꣣वा꣡ ह्य꣢ग्ने । ए꣣वा꣡ही꣢न्द्र । ए꣣वा꣡ हि पू꣢꣯षन् । ए꣣वा꣡ हि दे꣢꣯वाः ॐ ए꣣वा꣡हि दे꣢꣯वाः ॥६५०

ए꣣व꣢ । हि । ए꣣व꣢ । ए꣢व । हि । अ꣣ग्ने । एव꣢ । हि । इ꣣न्द्र । एव꣢ । हि । पू꣣षन् । एव꣢ । हि । दे꣣वाः । ॐ ए꣣वा꣡हिदे꣢꣯वाः ॥६५०॥

Mantra without Swara
एवाह्येऽ३ऽ३ऽ३व । एवा ह्यग्ने । एवाहीन्द्र । एवा हि पूषन् । एवा हि देवाः ॐ एवाहि देवाः ॥६५०

एव । हि । एव । एव । हि । अग्ने । एव । हि । इन्द्र । एव । हि । पूषन् । एव । हि । देवाः । ॐ एवाहिदेवाः ॥६५०॥

Samveda - Mantra Number : 650

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(एव हि-एव) हे परमात्मन्! ऐसे ही कहे गुणों वाला है (एवं हि-अग्ने) ऐसे ही अग्नि नाम से अग्रणेता परमात्मन् तू ही है (एव हि-इन्द्र) ऐसा ही ऐश्वर्य वाला इन्द्र नाम से तू है (एव हि पूषन्) ऐसा ही पुष्टिकर्ता पूषा नाम से परमात्मन् तू है (एव हि देवाः) ऐसे ही दिव्यगुणों से युक्त तू भिन्न-भिन्न देव नामों से कहा परमात्मन् तू ही है।
Essence
हे परमात्मन्! इन मन्त्रों में उपासकों की वाणी में संसार में तेरा ही कीर्तन है, कहीं पूर्ण पुरुष नाम से तेरी पूर्णता स्मरण है, कहीं अग्नि नाम से अग्रणिरूप में तेरा स्तवन है। कहीं इन्द्र नाम से तेरे ऐश्वर्यवान् रूप का प्रशंसन है, कहीं पूषा नाम से पोषणकर्ता के रूप में तेरा यशोगान है, कहीं बहुवचन में समस्त देवधर्मों वाला मानकर तेरी स्तुति है, इस प्रकार समस्त दिव्यगुणों वाले तुझ परमात्मा की स्तुति-प्रार्थना-उपासना करते हैं, करते रहें॥१०॥
Special