Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 638

1875 Mantra
Devata- सूर्यः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
उ꣡द्द्यामे꣢꣯षि꣣ र꣡जः꣢ पृ꣣थ्व꣢हा꣣ मि꣡मा꣢नो अ꣣क्तु꣡भिः꣢ । प꣢श्य꣣ञ्ज꣡न्मा꣢नि सूर्य ॥६३८॥

उ꣢त् । द्याम् । ए꣣षि । र꣡जः꣢꣯ । पृ꣣थु꣢ । अ꣡हा꣢꣯ । अ । हा꣣ । मि꣡मा꣢꣯नः । अ꣣क्तु꣡भिः꣢ । प꣡श्य꣢꣯न् । ज꣡न्मा꣢꣯नि । सू꣣र्य ॥६३८॥

Mantra without Swara
उद्द्यामेषि रजः पृथ्वहा मिमानो अक्तुभिः । पश्यञ्जन्मानि सूर्य ॥

उत् । द्याम् । एषि । रजः । पृथु । अहा । अ । हा । मिमानः । अक्तुभिः । पश्यन् । जन्मानि । सूर्य ॥६३८॥

Samveda - Mantra Number : 638
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सूर्य) हे सरणशील—व्यापनशील परमात्मन्! तू (द्याम्) द्युलोक को (रजः) अन्तरिक्ष को “रजसः.....अन्तरिक्षलोकस्य” [निरु॰ १२.७] (पृथु) ठोस—पृथिवीपिण्ड को (अक्तुभिः-अहा) रात्रियों के साथ दिनों को—रात्रि-दिनों को (मिमानः) निर्माण करता हुआ (जन्मानि पश्यन्) हम जन्म पाने वालों को दृष्टि में रखने के हेतु (उदेषि) उत्साह से प्राप्त हो।
Essence
व्यापनशील परमात्मा द्युलोक अन्तरिक्षलोक पृथिवीलोक—तीनों लोकों को तथा दिन-रातों को निर्माण करता हुआ हम जन्म पाने वालों पर कृपादृष्टि रखता हुआ उत्साह से प्राप्त होता है या हम जन्म पाने वालों पर कृपादृष्टि रखने के हेतु इन सबका निर्माण करता है जिससे हम भोग अपवर्ग पासकें अतः हमें उसकी उपासना करनी चाहिए॥१२॥
Special