Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 608

1875 Mantra
Devata- रात्रिः Rishi- वामदेवो गौतमः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
आ꣡ प्रागा꣢꣯द्भ꣣द्रा꣡ यु꣢व꣣ति꣡रह्नः꣢꣯ के꣣तू꣡न्त्समी꣢꣯र्त्सति । अ꣡भू꣢द्भ꣣द्रा꣡ नि꣣वे꣡श꣢नी꣣ वि꣡श्व꣢स्य꣣ ज꣡ग꣢तो꣣ रा꣡त्री꣢ ॥६०८

आ꣢ । प्र । आ । अ꣣गात् । भद्रा꣢ । यु꣣वतिः । अ꣡ह्नः꣢꣯ । अ । ह्नः꣣ । केतू꣢न् । सम् । ई꣣र्त्सति । अ꣡भू꣢꣯त् । भ꣣द्रा꣢ । नि꣣वे꣡श꣢नी । नि꣣ । वे꣡श꣢꣯नी । वि꣡श्व꣢꣯स्य । ज꣡ग꣢꣯तः । रा꣡त्री꣢꣯ ॥६०८॥

Mantra without Swara
आ प्रागाद्भद्रा युवतिरह्नः केतून्त्समीर्त्सति । अभूद्भद्रा निवेशनी विश्वस्य जगतो रात्री ॥६०८

आ । प्र । आ । अगात् । भद्रा । युवतिः । अह्नः । अ । ह्नः । केतून् । सम् । ईर्त्सति । अभूत् । भद्रा । निवेशनी । नि । वेशनी । विश्वस्य । जगतः । रात्री ॥६०८॥

Samveda - Mantra Number : 608
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(रात्री) उपासकों को रमण कराने वाली या आनन्द देने वाली परमात्मा की श्री—आश्रयरूपा छाया, रक्षा “यस्यच्छायाऽमृतम्” [ऋ॰ १०.१२१.२] “रात्रिरेव श्रीः” [श॰ १०.२.६.१६] “क्षेमो रात्रिः” [श॰ १३.१.४.३] (भद्रा) कल्याणरूपा—कल्याणकारिणी (युवतिः) दुःखबन्धन से अलग करने और मोक्षानन्द से मिलाने वाली (अह्नः केतून्) अज्ञानान्धकार को नष्ट करने वाले ज्ञानानन्द का उपहार देने वाले प्रेरक परमात्मा के “अहरेव सविता” [गो॰ १.१.३३] प्रज्ञानों—बोधप्रेरणाओं या झाँकियों को “केतुः प्रज्ञानम्” [निघं॰ ३.९] (समीर्त्सति) समृद्ध करती है (भद्रा) वह कल्याणरूपा (विश्वस्य जगतः) समस्त उपासक या मनुष्यमात्र की (निवेशनी-अभूत्) अपने में निवेश—पूर्ण आश्रय देने वाली है।
Essence
उपासकों को रमण कराने वाली या आनन्द देने वाली परमात्मा की श्री—आश्रयरूपा छाया रक्षा कल्याणकारी दुःखबन्धन से अलग करने और सुख मोक्षानन्द से मिलाने वाली अज्ञानान्धकार को नष्ट करने, ज्ञानानन्द का उपहार देनेवाले प्रेरक परमात्मा के प्रज्ञानों—बोध सङ्केतों को या झाँकियों को समृद्धि करती है। परमात्मा की ओर गति करने वाले मनुष्यमात्र का आश्रय देने वाली है॥७॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय उपासनीय देव वाला)॥ देवता—रात्रिः (सुखदात्री परमात्मा की छाया शरण)॥