Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 604

1875 Mantra
Devata- सोमः Rishi- गोतमो राहूगणः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
त्व꣢मि꣣मा꣡ ओष꣢꣯धीः सोम꣣ वि꣢श्वा꣣स्त्व꣢म꣣पो꣡ अ꣢जनय꣣स्त्वं꣢ गाः । त्व꣡मात꣢꣯नोरु꣣र्वा꣢३न्त꣡रि꣢क्षं꣣ त्वं꣡ ज्योति꣢꣯षा꣣ वि꣡ तमो꣢꣯ ववर्थ ॥६०४॥

त्व꣢म् । इ꣣माः꣢ । ओ꣡ष꣢꣯धीः । ओ꣡ष꣢꣯ । धीः꣣ । सोम । वि꣡श्वाः꣢꣯ । त्वम् । अ꣣पः꣢ । अ꣣जनयः । त्व꣢म् । गाः । त्वम् । आ । अ꣣तनोः । उरु꣢ । अ꣣न्त꣡रि꣢क्षम् । त्वम् । ज्यो꣡ति꣢꣯षा । वि । त꣡मः꣢꣯ । व꣣वर्थ ॥६०४॥

Mantra without Swara
त्वमिमा ओषधीः सोम विश्वास्त्वमपो अजनयस्त्वं गाः । त्वमातनोरुर्वा३न्तरिक्षं त्वं ज्योतिषा वि तमो ववर्थ ॥

त्वम् । इमाः । ओषधीः । ओष । धीः । सोम । विश्वाः । त्वम् । अपः । अजनयः । त्वम् । गाः । त्वम् । आ । अतनोः । उरु । अन्तरिक्षम् । त्वम् । ज्योतिषा । वि । तमः । ववर्थ ॥६०४॥

Samveda - Mantra Number : 604
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! (त्वम्) तू (इमाः-विश्वाः-ओषधीः-अजनयः) इन समस्त ओषधियों—तापनाशक द्रव्यों को उत्पन्न करता है (त्वम्-अपः) तू शान्तिकारक जलों को उत्पन्न करता है (त्वं गाः) तू निर्वाह के साधन गौ आदि पशुओं तथा निवास के आश्रय पृथिवी प्रदेशों को उत्पन्न करता है (त्वम्-उरु-अन्तरिक्षम्-आतनोः) तू अवकाशप्रद महान् खुले आकाश को समन्तरूप से तानता है (त्वं ज्योतिषा तमः-वि ववर्थ) तू ज्योति से अज्ञान तथा अन्धकार को अलग करता है, हटाता है।
Essence
हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू बड़ा महान् उपकारक है अपनी हम प्रजाओं के ताप भूख हरने के लिये ओषधियों को—शान्तिकारक जलों को जीवननिर्वाहक गौओं निवासाश्रय के लिये भू-प्रदेशों को अवकाशदानार्थ खुले आकाश को उत्पन्न करता है तथा अज्ञान अन्धकार के निवारणार्थ ज्योति को प्रकट करता है, सचमुच तू सर्वथा उपासनीय स्तुति योग्य है॥३॥
Special
ऋषिः—गोतमः (परमात्मा के प्रति अत्यन्त गतिशील उपासक)॥ देवता—पवमानः (आनन्दधारा में प्राप्त होता हुआ परमात्मा)॥ छन्दः—त्रिष्टुप्॥