Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 60

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- उत्कीलः कात्यः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣य꣢म꣣ग्निः꣢ सु꣣वी꣢र्य꣣स्ये꣢शे꣣ हि꣡ सौभ꣢꣯गस्य । रा꣡य꣣ ई꣢शे स्वप꣣त्य꣢स्य꣣ गो꣡म꣢त꣣ ई꣡शे꣢ वृत्र꣣ह꣡था꣢नाम् ॥६०॥

अ꣣य꣢म् । अ꣣ग्निः꣢ । सु꣣वी꣡र्य꣣स्य । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯स्य । ई꣡शे꣢꣯ । हि । सौ꣡भ꣢꣯गस्य । सौ । भ꣣गस्य । रायः꣢ । ई꣣शे । स्वपत्य꣡स्य꣣ । सु꣣ । अपत्य꣡स्य꣢ । गो꣡म꣢꣯तः । ई꣡शे꣢꣯ । वृ꣣त्रह꣡था꣢नाम् । वृ꣣त्र । ह꣡था꣢꣯नाम् ॥६०॥

Mantra without Swara
अयमग्निः सुवीर्यस्येशे हि सौभगस्य । राय ईशे स्वपत्यस्य गोमत ईशे वृत्रहथानाम् ॥

अयम् । अग्निः । सुवीर्यस्य । सु । वीर्यस्य । ईशे । हि । सौभगस्य । सौ । भगस्य । रायः । ईशे । स्वपत्यस्य । सु । अपत्यस्य । गोमतः । ईशे । वृत्रहथानाम् । वृत्र । हथानाम् ॥६०॥

Samveda - Mantra Number : 60
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अयम्-अग्निः) यह सर्वप्रकाशक परमात्मदेव (सुवीर्यस्य सौभगस्य-हि-ईशे) उत्तम आयु—मुक्ति की आयु “आयुर्वीर्यम्” [मै॰ १.७.५] का और सौभाग्य का स्वामित्व करता है अतएव उसका प्रदान करता है (स्वपत्यस्य गोमतः-रायः-ईशे) उत्तम अपत्य सन्तान जिससे होती है ऐसे, प्रशस्त इन्द्रियाँ रहती हैं जिसमें ऐसे सदाचार संयमरूप ऐश्वर्य का स्वामित्व करता है (वृत्रहथानाम्-ईशे) पापों के हनन साधनों का “पाप्मा वै वृत्रः” [श॰ ११.१.५.७] भी स्वामित्व करता है॥
Essence
परमात्मा मानव के मोक्षैश्वर्य का भी स्वामी है जीवन्मुक्त को सौभाग्य प्रदान करता है और मृत्यु के अनन्तर मोक्ष की प्रशस्तदीर्घ आयु को प्रदान करता है तथा इहलोक संसार में मानव की प्रशस्त बीजशक्ति के स्थिर भाव-सदाचार प्रशस्त इन्द्रियों वाले संयमरूप ऐश्वर्य का भी स्वामी है उसे प्रदान करता है। इन दोनों ऐश्वर्यों के घातक पाप भावों के नाशक विचारों का भी स्वामी है उन सद् विचारों से पाप भाव नष्ट हो जाते हैं॥६॥
Special
ऋषिः—उत्कीलः (पापदारिद्र्य का उच्छेद करने वाला उपासक)॥