Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 598

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣ वा꣡जे꣢षु नोऽव स꣣ह꣡स्र꣢प्रधनेषु च । उ꣣ग्र꣢ उ꣣ग्रा꣡भि꣢रू꣣ति꣡भिः꣢ ॥५९८॥

इ꣡न्द्र꣢꣯ । वा꣡जे꣢꣯षु । नः꣣ । अव । सह꣡स्र꣢प्रधनेषु । स꣣ह꣡स्र꣢ । प्र꣣धनेषु । च । उग्रः꣢ । उ꣣ग्रा꣡भिः꣢ । ऊ꣣ति꣡भिः꣢ ॥५९८॥

Mantra without Swara
इन्द्र वाजेषु नोऽव सहस्रप्रधनेषु च । उग्र उग्राभिरूतिभिः ॥

इन्द्र । वाजेषु । नः । अव । सहस्रप्रधनेषु । सहस्र । प्रधनेषु । च । उग्रः । उग्राभिः । ऊतिभिः ॥५९८॥

Samveda - Mantra Number : 598
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! तू (उग्रः) तेजस्वी हुआ (उग्रेभिः-ऊतिभिः) अपनी तेजस्वी रक्षाविधियों के द्वारा (वाजेषु) इन्द्रिय विषयरूप साधारण संघर्ष प्रसङ्गों में (च) और (सहस्र-प्रधनेषु) बहुत बार होने वाले कामादि सम्बन्धी मानस संग्रामों में (नः-अव) हमारी रक्षा कर।
Essence
निश्चय तेजस्वी परमात्मा अपनी तेजस्वी रक्षाविधियों के द्वारा भोग संघर्षों में और सहस्र बार सताने वाले कामादि सम्बन्धी मानस संग्रामों में हमारी रक्षा किया करता है, अतः उसकी उपसना करनी चाहिए॥४॥
Footnote
[*47. “स्वगं एव लोको विश्वेदेवाः” [जै॰ १.३३५]।]
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दा वैश्वामित्र (सर्वमित्र आचार्य से सम्बद्ध मधुर इच्छा वाला)॥ देवता—इन्द्रः (ऐश्वर्यवान् परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥