Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 597

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
इ꣢न्द्र꣣ इ꣢꣫द्धर्योः꣣ स꣢चा꣣ स꣡म्मि꣢श्ल꣣ आ꣡ व꣢चो꣣यु꣡जा꣢ । इ꣡न्द्रो꣢ व꣣ज्री꣡ हि꣢र꣣ण्य꣡यः꣢ ॥५९७॥

इ꣡न्द्रः꣢꣯ । इत् । ह꣡र्योः꣢꣯ । स꣡चा꣢꣯ । स꣡म्मि꣢꣯श्लः । सम् । मि꣣श्लः । आ꣢ । व꣣चोयु꣡जा꣢ । व꣣चः । यु꣡जा꣢꣯ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । व꣣ज्री꣢ । हि꣣रण्य꣡यः꣢ ॥५९७॥

Mantra without Swara
इन्द्र इद्धर्योः सचा सम्मिश्ल आ वचोयुजा । इन्द्रो वज्री हिरण्ययः ॥

इन्द्रः । इत् । हर्योः । सचा । सम्मिश्लः । सम् । मिश्लः । आ । वचोयुजा । वचः । युजा । इन्द्रः । वज्री । हिरण्ययः ॥५९७॥

Samveda - Mantra Number : 597
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (वचोयुजा हर्योः) अपने वचन—आदेश या प्रार्थना से युक्त होने वाले दुःखापहर्ता और सुखाहर्ता दोनों ज्योति और स्नेह या कृपा और प्रसाद का (सचा-आमिश्लः) समन्तरूप से उपासक में मेल कराने वाला है तथा (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (वज्री हिरण्ययः) ओजस्वी “वज्रो वा ओजः” [श॰ ८.४.१.२०] और सुशोभन है।
Essence
परमात्मा के आदेश से या उपासक की प्रार्थना से युक्त होने वाले ज्योति और स्नेह या कृपा और प्रसाद का साथ सम्यक् मिश्रण करनेवाला ऐश्वर्यवान् परमात्मा है और वह अपने रूप में ओजस्वी तथा सुशोभन है, उसकी स्तुति करनी चाहिए॥३॥
Special
ऋषिः—मधुच्छन्दा वैश्वामित्र (सर्वमित्र आचार्य से सम्बद्ध मधुर इच्छा वाला)॥ देवता—इन्द्रः (ऐश्वर्यवान् परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥