Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 595

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- श्रुतकक्ष आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आरण्यं काण्डम् Gaan- आरण्य गान
Mantra with Swara
त्व꣢मे꣣त꣡द꣢धारयः कृ꣣ष्णा꣢सु꣣ रो꣡हि꣢णीषु च । प꣡रु꣢ष्णीषु꣣ रु꣢श꣣त्प꣡यः꣢ ॥५९५॥

त्व꣢म् । ए꣣त꣢त् । अ꣣धारयः । कृष्णा꣡सु꣢ । रो꣡हि꣢꣯णीषु । च꣣ । प꣡रु꣢꣯ष्णीषु । रु꣡श꣢꣯त् । प꣡यः꣢꣯ ॥५९५॥

Mantra without Swara
त्वमेतदधारयः कृष्णासु रोहिणीषु च । परुष्णीषु रुशत्पयः ॥

त्वम् । एतत् । अधारयः । कृष्णासु । रोहिणीषु । च । परुष्णीषु । रुशत् । पयः ॥५९५॥

Samveda - Mantra Number : 595
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 3; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे ऐश्वर्यवन् परमात्मन्! (त्वम्) तू (कृष्णासु) कृष्ण रङ्ग वाली रसवाहिनी नाड़ियों में (रोहिणीषु) रक्तवाहिनी नाड़ियों में (परुष्णीषु) ज्ञानवाहिनी नाड़ियों में (एतत्) यह (रुशत्) ज्वलित—रोचमान “रुशत्....रोचमान” “रुशत् वर्णनाम रोचतेर्ज्वलितिकर्मणः” [निरु॰ ६.१४] (पयः) प्राण को “प्राणः पयः” [श॰ ६.५.४.१५] (अधारयः) धारण करा।
Essence
ऐश्वर्यवान् परमात्मा हमारे शरीर की रसवाहिनी नाड़ियों में रक्तवाहिनी नाड़ियों में तथा ज्ञानवाहिनी नाड़ियों में इस अध्यात्म-प्रेरक रोचमान प्राण को धारण करा, अध्यात्म-विरोधी रस, रक्त और ज्ञान का वहन करने वाला न हो, किन्तु रोचमान प्राण उनमें कार्य करता रहे॥१॥
Special
ऋषिः—श्रुतकक्षः (सुन लिया अध्यात्मकक्ष जिसने ऐसा उपासक)॥ देवता—इन्द्रः (ऐश्वर्यवान् परमात्मा)॥ छन्दः—गायत्री॥