Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 580

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- ऋजिश्वा भारद्वाजः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ सो꣢ता꣣ प꣡रि꣢ षिञ्च꣣ता꣢श्वं꣣ न꣡ स्तोम꣢꣯म꣣प्तु꣡र꣢ꣳ रज꣣स्तु꣡र꣢म् । व꣣नप्रक्ष꣡मु꣢द꣣प्रु꣡त꣢म् ॥५८०॥

आ꣢ । सो꣣त । प꣡रि꣢꣯ । सि꣣ञ्चत । अ꣡श्व꣢꣯म् । न । स्तो꣡म꣢꣯म् । अ꣣प्तु꣡र꣢म् । र꣣जस्तु꣡र꣢म् । व꣣नप्रक्ष꣢म् । व꣣न । प्रक्ष꣢म् । उ꣣दप्रु꣡त꣢म् । उ꣣द । प्रु꣡त꣢꣯म् ॥५८०॥

Mantra without Swara
आ सोता परि षिञ्चताश्वं न स्तोममप्तुरꣳ रजस्तुरम् । वनप्रक्षमुदप्रुतम् ॥

आ । सोत । परि । सिञ्चत । अश्वम् । न । स्तोमम् । अप्तुरम् । रजस्तुरम् । वनप्रक्षम् । वन । प्रक्षम् । उदप्रुतम् । उद । प्रुतम् ॥५८०॥

Samveda - Mantra Number : 580
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(स्तोमम्) स्तुतियोग्य—उपासनीय (अप्तुरम्) प्राणों को प्रेरित करने वाले—“आपो वै प्राणाः” [श॰ ३.८.२.४] (रजस्तुरम्) ज्ञानज्योतिप्रेरक “ज्योती रज उच्यते” [निरु॰ ४.१९] (वनप्रक्षम्) वननीय मोक्ष का सम्पर्क कराने वाले—(उदप्रुतम्) आर्द्र आनन्दरस के प्रेरक—“प्रु गतौ” [भ्वादि॰] (अश्वम्) व्यापक—(न) सम्प्रति “न सम्प्रत्यर्थे” [निरु॰ ६.८] परमात्मा को (आसोत) हृदय में आभासित करो (परिषिञ्चत) आत्मा में श्रद्धा से आभरित करो।
Essence
उपासकजनो! तुम स्तुति करने योग्य प्राणप्रेरक बलप्रद ज्ञानज्योतिप्रसारक मोक्ष से सम्पर्क कराने वाले आनन्दरसप्रवाहक व्यापक परमात्मा को हृदय में साक्षात् करो और श्रद्धा से धारण करो॥३॥
Special
ऋषिः—ऋजिश्वा (सत्य सरल जीवनयात्रा का पथिक उपासक)॥