Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 579

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- ऊर्ध्वसद्मा आङ्गिरसः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣भि꣢ द्यु꣣म्नं꣢ बृ꣣ह꣢꣫द्यश꣣ इ꣡ष꣢स्पते दिदी꣣हि꣡ दे꣢व देव꣣यु꣢म् । वि꣡ कोशं꣢꣯ मध्य꣣मं꣡ यु꣢व ॥५७९॥

अ꣣भि꣢ । द्यु꣣म्न꣢म् । बृ꣣ह꣢त् । य꣡शः꣢꣯ । इ꣡षः꣢꣯ । प꣣ते । दिदीहि꣢ । दे꣣व । देवयु꣢म् । वि । को꣡श꣢꣯म् । म꣣ध्यम꣢म् । यु꣣व ॥५७९॥

Mantra without Swara
अभि द्युम्नं बृहद्यश इषस्पते दिदीहि देव देवयुम् । वि कोशं मध्यमं युव ॥

अभि । द्युम्नम् । बृहत् । यशः । इषः । पते । दिदीहि । देव । देवयुम् । वि । कोशम् । मध्यमम् । युव ॥५७९॥

Samveda - Mantra Number : 579
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 11;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इषस्पते देव) हे इच्छा कामना के पालक—कामनापूरक शान्तस्वरूप परमात्मदेव! तू (बृहत्-द्युम्नं यशः) ऊँचे—अनश्वर धन को “द्युम्नं धननाम” [निघं॰ २.१०] और ऊँचे—अनश्वर अन्न—अमृत अन्न मोक्षभोग को “यशः-अन्ननाम” [निघं॰.......] (देवयुवम्-अभि) तुझ देव की ओर चलने वाले के प्रति (दिदीहि) उपहार देदे—प्रसादरूप में देदे “दाञ् दाने” [जुहो॰] ‘छान्दसं रूपम्’ (मध्यमं कोशम्) भीतर वाले कोष्ठ अर्थात् शरीर और आत्मा के मध्य में वर्तमान अन्तःकरण या मन को (वियुव) विकसित कर—खोल।
Essence
हे कामनापूरक परमात्मन्! तेरी ओर चलने वाले के प्रति तू अनश्वरधन—मौक्षैश्वर्य और अमृतभोग मोक्षानन्द प्रदान करता है तथा उसके मन को विकसित कर देता है॥२॥
Special
ऋषिः—ऊर्ध्वसद्मा (ऊँचे सदन—मोक्षधाम वाला मोक्षार्थी)॥