Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 568

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- पर्वतनारदौ काण्वौ Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
स꣡खा꣢य꣣ आ꣡ नि षी꣢꣯दत पुना꣣ना꣢य꣣ प्र꣡ गा꣢यत । शि꣢शुं꣣ न꣢ य꣣ज्ञैः꣡ परि꣢꣯ भूषत श्रि꣣ये꣢ ॥५६८॥

स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । आ꣢ । नि । सी꣣दत । पुनाना꣡य꣢ । प्र । गा꣣यत । शि꣡शुम् । न । य꣣ज्ञैः꣢ । प꣡रि꣢꣯ । भू꣣षत । श्रिये꣢ ॥५६८॥

Mantra without Swara
सखाय आ नि षीदत पुनानाय प्र गायत । शिशुं न यज्ञैः परि भूषत श्रिये ॥

सखायः । स । खायः । आ । नि । सीदत । पुनानाय । प्र । गायत । शिशुम् । न । यज्ञैः । परि । भूषत । श्रिये ॥५६८॥

Samveda - Mantra Number : 568
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 10;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सखायः) हे समानख्यान—समानधर्मी उपासकजनो! (आनिषीदत) समन्तरूप से सुखासन पर बैठो (पुनानाय) जीवन को शुद्ध करने वाले सोम—शान्तस्वरूप परमात्मा के लिये (प्रगायत) प्रकृष्टगान स्तवन करो (श्रिये) अपने कल्याण के लिये “श्रीर्वै भद्रम्” [जै॰ ३.१७२] (शिशुं न यज्ञैः परिभूषत) शंसनीय लघुबालक के समान सोम—शान्तस्वरूप परमात्मा को “शिशुः शंसनीयो भवति” [निरु॰ १०.३९] अध्यात्मयज्ञों—सङ्गतिकरणों से सब ओर भूषित—सम्मानित करो।
Essence
हे समानधर्मी उपासकजनो! समन्तरूप से सुखासन पर बैठो। उस पवित्र करने वाले परमात्मा के लिये अपने कल्याण के लिये अच्छा स्तवन करो। प्रशंसनीय बालक के समान सङ्गतिकरणों से परिभूषित करो॥३॥
Special
ऋषिः—पर्वतनारदावृषी (पर्ववान्—आत्मतृप्तिमान् और नार—नरविषयक ज्ञान देने वाला)॥