Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 551

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- रेभसूनू काश्यपौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ ह꣢र्य꣣ता꣡य꣢ धृ꣣ष्ण꣢वे꣣ ध꣡नु꣢ष्टन्वन्ति꣣ पौ꣡ꣳस्य꣢म् । शु꣣क्रा꣢꣫ वि य꣣न्त्य꣡सु꣢राय नि꣣र्णि꣡जे꣢ वि꣣पा꣡मग्रे꣢꣯ मही꣣यु꣡वः꣢ ॥५५१॥

आ꣢ । ह꣣र्यता꣡य꣢ । धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ । ध꣡नुः꣢꣯ । त꣣न्वन्ति । पौँ꣡स्य꣢꣯म् । शु꣣क्राः꣢ । वि । य꣣न्ति । अ꣡सु꣢꣯राय । अ । सु꣣राय । निर्णि꣡जे꣢ । निः꣣ । नि꣡जे꣢꣯ । वि꣣पा꣢म् । अ꣡ग्रे꣢꣯ । म꣣हीयु꣡वः꣢ ॥५५१॥

Mantra without Swara
आ हर्यताय धृष्णवे धनुष्टन्वन्ति पौꣳस्यम् । शुक्रा वि यन्त्यसुराय निर्णिजे विपामग्रे महीयुवः ॥

आ । हर्यताय । धृष्णवे । धनुः । तन्वन्ति । पौँस्यम् । शुक्राः । वि । यन्ति । असुराय । अ । सुराय । निर्णिजे । निः । निजे । विपाम् । अग्रे । महीयुवः ॥५५१॥

Samveda - Mantra Number : 551
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 8;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(विपाम्-अग्रे) मेधावी जनों के “विपो मेधाविनः” [निघं॰ ३.१५] आगे रहने वाले, (शुक्राः) शुद्ध—निष्पाप (महीयुवः) महती मोक्षपदवी के चाहने वाले मुमुक्षुजन (धृष्णवे) पापभाव को धर्षि करने वाले—(हर्यताय) कमनीय परमात्मा के लिये—उसके आनन्द प्राप्त करने के लिये (पौंस्यं धनुः-आतन्वन्ति) पौरुष—बलयुक्त “पौंस्यं बलम्” [निघं॰ २.९] प्रणव—‘ओ३म्’ नाम धनुष को समन्तरूप से तानते हैं “प्रणवो धनुः शरो ह्यात्मा ब्रह्म तल्लक्ष्यमुच्यते। अप्रमत्तेन वेद्धव्यं शरवत्तन्मयो भवेत्” [मुण्ड॰ २.२.४] (असुराय निर्णिजे) प्राणदाता शुद्धस्वरूप में लाने वाले शान्त परमात्मा के लिये (वियन्ति) विशेष याचना और प्रार्थना करते हैं “यन्ति याचनाकर्मा” [निरु॰ ३.१९]।
Essence
मोक्षपदवी के इच्छुक मुमुक्षु उपासकजन पापभावों को मिटाने वाले कमनीय शान्त परमात्मा की प्राप्ति के लिए—उसके आनन्दरस पाने के लिए प्रणव—ओ३म् नामक बलवान् बलिष्ठ धनुष—ओ३म् जप को समन्तरूप से तानते हैं अर्थभावन के साथ “तज्जपस्तदर्थभावनम्” [योग॰ १।२८] प्राणप्रद निजशुद्धस्वरूप में लानेवाले परमात्मा के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं॥७॥
Special
ऋषिः—रेभसूनू काश्यपावृषी (ज्ञानी गुरु से सम्बद्ध स्तुति प्रेरित करने वाले दो परमात्मोपासक)॥