Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 544

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣣पा꣢मि꣣वे꣢दू꣣र्म꣣य꣣स्त꣡र्त्तुराणाः꣢ प्र꣡ म꣢नी꣣षा꣡ ई꣢रते꣣ सो꣢म꣣म꣡च्छ꣢ । न꣣मस्य꣢न्ती꣣रु꣡प꣢ च꣣ य꣢न्ति꣣ सं꣡ चाच꣢꣯ विशन्त्युश꣣ती꣢रु꣣श꣡न्त꣢म् ॥५४४॥

अ꣣पा꣢म् । इ꣣व । इ꣢त् । ऊ꣣र्म꣡यः꣢ । त꣡र्त्तु꣢꣯राणाः । प्र । म꣣नीषाः꣢ । ई꣣रते । सो꣡म꣢꣯म् । अ꣡च्छ꣢꣯ । न꣣मस्य꣡न्तीः꣢ । उ꣡प꣢꣯ । च꣣ । य꣡न्ति꣢꣯ । सम् । च꣣ । आ꣢ । च꣣ । विशन्ति । उशतीः꣢ । उ꣣श꣡न्त꣢म् ॥५४४॥

Mantra without Swara
अपामिवेदूर्मयस्तर्त्तुराणाः प्र मनीषा ईरते सोममच्छ । नमस्यन्तीरुप च यन्ति सं चाच विशन्त्युशतीरुशन्तम् ॥

अपाम् । इव । इत् । ऊर्मयः । तर्त्तुराणाः । प्र । मनीषाः । ईरते । सोमम् । अच्छ । नमस्यन्तीः । उप । च । यन्ति । सम् । च । आ । च । विशन्ति । उशतीः । उशन्तम् ॥५४४॥

Samveda - Mantra Number : 544
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 7;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अपां तर्तुराणाः-ऊमर्यः-इव-इत्) जल स्रोतों की शीघ्र लहराती—फरकती हुई तरङ्गों की भाँति ही (मनीषाः) उपासक की प्रज्ञाएँ—ध्यान वृत्तियाँ (सोमम्-अच्छ) प्राप्तव्य शान्तस्वरूप परमात्मा की ओर (प्र-ईरते) उपासक को प्रेरित करती हैं, पुनः (च) और वे (नमस्यन्तीः-उपयन्ति) नमती हुई परमात्मा को प्राप्त होती हैं (उशन्तीः-उशन्तम्) चाहती हुई चाहते हुए को—में (संविशन्ति) संवेश करती हैं (च) और (आविशन्ति च) आविष्ट होती भी हैं।
Essence
जल स्रोतों की शीघ्र फरकती हुई तरङ्गों की भाँति उपासक की ध्यान वृत्तियाँ उपासक को परमात्मा की ओर प्रेरित करती हैं जो परमात्मा की ओर नमती हुईं उस चाहते हुए परमात्मा को चाहती हुईं उस तक पहुँचती हैं और उस में स्थायी आश्रय भी ले लेती हैं॥१२॥
Special
ऋषिः—प्रस्कण्वः (अत्यन्त मेधावी उपासक)॥