Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 527

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रतर्दनो दैवोदासिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
सो꣡मः꣢ पवते जनि꣣ता꣡ म꣢ती꣣नां꣡ ज꣢नि꣣ता꣢ दि꣣वो꣡ ज꣢नि꣣ता꣡ पृ꣢थि꣣व्याः꣢ । ज꣣निता꣡ग्नेर्ज꣢꣯नि꣣ता꣡ सूर्य꣢꣯स्य जनि꣣ते꣡न्द्र꣢स्य जनि꣣तो꣡त विष्णोः꣢꣯ ॥५२७॥

सो꣡मः꣢꣯ । प꣣वते । जनिता꣢ । म꣣तीना꣢म् । ज꣣निता꣢ । दि꣣वः꣢ । ज꣣निता꣢ । पृ꣣थिव्याः꣢ । ज꣣निता꣢ । अ꣣ग्नेः꣢ । ज꣣निता꣢ । सू꣡र्य꣢꣯स्य । ज꣣निता꣢ । इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । ज꣣निता꣢ । उ꣣त꣢ । वि꣡ष्णोः꣢꣯ ॥५२७॥

Mantra without Swara
सोमः पवते जनिता मतीनां जनिता दिवो जनिता पृथिव्याः । जनिताग्नेर्जनिता सूर्यस्य जनितेन्द्रस्य जनितोत विष्णोः ॥

सोमः । पवते । जनिता । मतीनाम् । जनिता । दिवः । जनिता । पृथिव्याः । जनिता । अग्नेः । जनिता । सूर्यस्य । जनिता । इन्द्रस्य । जनिता । उत । विष्णोः ॥५२७॥

Samveda - Mantra Number : 527
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोमः पवते) शान्तस्वरूप परमात्मा आनन्दधारारूप में उपासकों को प्राप्त होता है, वह (मतीनां जनिता) उपासकों के अन्दर मतियों—बुद्धियों का जनयिता है, केवल इतना ही नहीं किन्तु (दिवः-जनिता) द्युलोक का जनयिता है (पृथिव्याः-जनिता) पृथिवीलोक का भी जनयिता (अग्नेः-जनिता) अग्नि का भी जनयिता (सूर्यस्य जनिता) सूर्य का जनयिता (इन्द्रस्य जनिता) विद्युत् का जनयिता है (उत) और (विष्णोः-जनिता) व्यापक आकाश वायुसहित का जनयिता है।
Essence
शान्तस्वरूप परमात्मा उपासकों में मतियों बुद्धियों को उपासना द्वारा, उत्पन्न करता ही है परन्तु समस्त जड़ देवों द्युलोक, पृथिवीलोक, अग्नि, सूर्य, विद्युत्, आकाश, वायु को भी उत्पन्न करता है॥५॥
Special
ऋषिः—प्रर्तदनः (पापाज्ञाननाशक)॥