Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 506

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
म꣣न्द्र꣡या꣢ सोम꣣ धा꣡र꣢या꣣ वृ꣡षा꣢ पवस्व देव꣣युः꣢ । अ꣢व्या꣣ वा꣡रे꣢भिरस्म꣣युः꣢ ॥५०६॥

म꣣न्द्र꣡या꣢ । सो꣣म । धा꣡र꣢꣯या । वृ꣡षा꣢꣯ । प꣣वस्व । देवयुः꣢ । अ꣡व्याः꣢꣯ । वा꣡रे꣢꣯भिः । अ꣣स्म꣢युः ॥५०६॥

Mantra without Swara
मन्द्रया सोम धारया वृषा पवस्व देवयुः । अव्या वारेभिरस्मयुः ॥

मन्द्रया । सोम । धारया । वृषा । पवस्व । देवयुः । अव्याः । वारेभिः । अस्मयुः ॥५०६॥

Samveda - Mantra Number : 506
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू (वृषा) सुखवर्षक (देवयुः) पूर्ववर्ती जीवन्मुक्तों को चाहने वाला, तथा (अस्मयुः) इस समय के हम उपासकों को चाहने वाला (मन्द्रया धारया पवस्व) आनन्दकर धारा से प्राप्त हो (वारेभिः-अव्याः) पापवासना वारण करने वाले गुण-धर्म-कर्मों के द्वारा हमारी रक्षा कर।
Essence
सुखवर्षक सोमरूप शान्त परमात्मा पुरातन जीवन्मुक्तों को चाहता हुआ तथा नूतन हम उपासकों को चाहता हुआ आनन्दप्रद धारा से प्राप्त हो और पापवासना निवारक गुण-धर्म-कर्मों के द्वारा हमारी रक्षा कर॥१०॥
Special
ऋषिः—असितः काश्यपः (द्रष्टा—ज्ञानी से सम्बद्ध अज्ञानमुक्त उपासक)॥