Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 504

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
वृ꣡षा꣢ सोम द्यु꣣मा꣡ꣳ अ꣢सि꣣ वृ꣡षा꣢ देव꣣ वृ꣡ष꣢व्रतः । वृ꣡षा꣣ ध꣡र्मा꣢णि दध्रिषे ॥५०४॥

वृ꣡षा꣢꣯ । सो꣣म । द्युमा꣢न् । अ꣣सि । वृ꣡षा꣢꣯ । दे꣣व । वृ꣡ष꣢꣯व्रतः । वृ꣡ष꣢꣯ । व्र꣣तः । वृ꣡षा꣢꣯ । ध꣡र्मा꣢꣯णि । द꣣ध्रिषे ॥५०४॥

Mantra without Swara
वृषा सोम द्युमाꣳ असि वृषा देव वृषव्रतः । वृषा धर्माणि दध्रिषे ॥

वृषा । सोम । द्युमान् । असि । वृषा । देव । वृषव्रतः । वृष । व्रतः । वृषा । धर्माणि । दध्रिषे ॥५०४॥

Samveda - Mantra Number : 504
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू (वृषा द्युमान्) कामनावर्षक वीर्यवान् सामर्थ्यवान् है “द्युमत्तमेति वीर्यवत्तमेत्येतत्” [श॰ ६.२.१.३२] (असि) है (देव) हे दिव्यगुण परमात्मन्! तू (वृषा वृषव्रतः) सुखवर्षक धर्मव्रत—धर्म्यकर्म—यथार्थ कर्म वाला है (वृषा धर्माणि दध्रिषे) स्वयं धर्मस्वरूप होता हुआ धर्मों—नियमों को धारण करता है।
Essence
हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू कामनावर्षक सामर्थ्यवान् है। हे दिव्यगुण वाले परमात्मन्! तू सुखवर्षक धर्मव्रत—धर्म-कर्म वाला स्वयं धर्मरूप हुआ धर्मों नियमों को धारण करता है उन्हें चलाता है॥८॥
Special
ऋषिः—कश्यपः (द्रष्टा—परमात्मज्ञानी उपासक)॥