Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 503

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡र्षा꣢ सोम द्यु꣣म꣡त्त꣢मो꣣ऽभि꣡ द्रोणा꣢꣯नि꣣ रो꣡रु꣢वत् । सी꣢द꣣न्यो꣢नौ꣣ व꣢ने꣣ष्वा꣢ ॥५०३॥

अ꣡र्षा꣢꣯ । सो꣣म । द्युम꣡त्त꣢मः । अ꣣भि꣢ । द्रो꣡णा꣢꣯नि । रो꣡रु꣢वत् । सी꣡द꣢꣯न् । यो꣡नौ꣢꣯ । व꣡ने꣢꣯षु । आ ॥५०३॥

Mantra without Swara
अर्षा सोम द्युमत्तमोऽभि द्रोणानि रोरुवत् । सीदन्योनौ वनेष्वा ॥

अर्षा । सोम । द्युमत्तमः । अभि । द्रोणानि । रोरुवत् । सीदन् । योनौ । वनेषु । आ ॥५०३॥

Samveda - Mantra Number : 503
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सोम) हे आनन्दधारा में प्राप्त होने वाले शान्तस्वरूप परमात्मन्! तू (द्युमत्तमः) अत्यन्त द्योतनवान्—दीप्तिमान् हुआ “द्युमान् द्योतनवान्” [निरु॰ ६.१९] (वनेषु रोरुवत्) वननीय सम्भजनीय विषयों के निमित्त उत्तम उपदेश करने के हेतु (द्रोणानि-अभि-अर्ष) द्रोणकलशों—मूर्धा के अवकाशों को “मूर्धा द्रोणकलशाः” [मै॰ ४.५.९] प्राप्त हो (योनौ-आसीदन्) हृदय घर में विराजमान हो “योनिः-गृहनाम” [निघं॰ ३.४]।
Essence
हे आनन्दधारा में आने वाले शान्त प्यारे परमात्मन्! तू अत्यन्त द्योतमान हुआ वननीय मधुर बातों के निमित्त, उत्तम उपदेश देने के हेतु, मस्तिष्कावकाशों में प्राप्त हो और हृदयगृह में स्थिररूप से विराजमान हो॥७॥
Special
ऋषिः—भृगुः (तेजस्वी उपासक)॥