Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 500

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अवत्सारः काश्यपः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
त꣢र꣣त्स꣢ म꣣न्दी꣡ धा꣢वति꣣ धा꣡रा꣢ सु꣣त꣡स्यान्ध꣢꣯सः । त꣢र꣣त्स꣢ म꣣न्दी꣡ धा꣢वति ॥५००॥

त꣡र꣢꣯त् । सः । म꣣न्दी꣢ । धा꣣वति । धा꣡रा꣢꣯ । सु꣣त꣡स्य꣢ । अ꣡न्ध꣢꣯सः । त꣡र꣢꣯त् । सः । म꣣न्दी꣢ । धा꣣वति ॥५००॥

Mantra without Swara
तरत्स मन्दी धावति धारा सुतस्यान्धसः । तरत्स मन्दी धावति ॥

तरत् । सः । मन्दी । धावति । धारा । सुतस्य । अन्धसः । तरत् । सः । मन्दी । धावति ॥५००॥

Samveda - Mantra Number : 500
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(धारा सुतस्य) स्तुतिवाणी द्वारा स्तुत हुए (अन्धसः) आध्यानीय सोम—शान्तस्वरूप परमात्मा का (सः-मन्दी) वह स्तुतिकर्ता (तरत्) पाप को तरता है (धावति) ऊर्ध्वगति को जाता है—प्राप्त होता है (तरत् सः-मन्दी धावति) निश्चय वह स्तुतिकर्ता ऊर्ध्वगति को प्राप्त होता है “तरति स पापं सर्वं मन्दी य स्तौति धावति गच्छत्यूर्ध्वांगतिम्” [निरु॰ १३.६]।
Essence
समन्तरूप से ध्यान करने योग्य सोमरूप शान्त परमात्मा की स्तुति स्तुतिकर्ता पाप को तरता हुआ ऊर्ध्वगति को प्राप्त होता है निश्चित्त पाप को तर जाता है ऊँची गति को प्राप्त होता है॥४॥
Special
ऋषिः—अवत्सारः (रक्षा करते हुए परमात्मा—परमात्मा के अनुसार चलने वाला आस्तिक जन)॥