Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 50

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- प्रस्कण्वः काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
श्रु꣣धि꣡ श्रु꣢त्कर्ण꣣ व꣡ह्नि꣢भिर्दे꣣वै꣡र꣢ग्ने स꣣या꣡व꣢भिः । आ꣡ सी꣢दतु ब꣣र्हि꣡षि꣢ मि꣣त्रो꣡ अ꣢र्य꣣मा꣡ प्रा꣢त꣣र्या꣡व꣢भिरध्व꣣रे꣢ ॥५०॥

श्रु꣣धि꣢ । श्रु꣣त्कर्ण । श्रुत् । कर्ण । व꣡ह्नि꣢꣯भिः । दे꣣वैः꣢ । अ꣣ग्ने । सया꣡व꣢भिः । स꣣ । या꣡व꣢꣯भिः । आ । सी꣣दतु । बर्हि꣡षि꣢ । मि꣣त्रः꣢ । मि꣣ । त्रः꣢। अ꣣र्यमा꣢ । प्रा꣣तः । या꣡व꣢꣯भिः । अ꣣ध्वरे꣢ ॥५०॥

Mantra without Swara
श्रुधि श्रुत्कर्ण वह्निभिर्देवैरग्ने सयावभिः । आ सीदतु बर्हिषि मित्रो अर्यमा प्रातर्यावभिरध्वरे ॥

श्रुधि । श्रुत्कर्ण । श्रुत् । कर्ण । वह्निभिः । देवैः । अग्ने । सयावभिः । स । यावभिः । आ । सीदतु । बर्हिषि । मित्रः । मि । त्रः। अर्यमा । प्रातः । यावभिः । अध्वरे ॥५०॥

Samveda - Mantra Number : 50
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 5;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(श्रुत्कर्ण-अग्ने) हे श्रवणसमर्थ कर्णशक्तिवाले—श्रवणार्थ शक्तिरूप कर्ण वाले परमात्मन्! तू (श्रुधि) मेरी प्रार्थना को सुन स्वीकार कर, वह यह कि (अध्वरे बर्हिषि) अध्यात्म यज्ञ में हृदयाकाश में (सयावभिः-वह्निभिः-देवैः) साथ गमन करने वाले, साथ प्राप्त होने वाले निजस्वरूप वाहक दिव्यगुणों के साथ तू ‘आसीद-इत्याकांक्षा’ आ विराज। तथा (मित्रः-आसीदतु) आप वायुरूप होकर “अयं वै वायुर्मित्रोऽयं पवते” [श॰ ६.५.४.१४] विराजें (प्रातर्यावभिः-अर्यमा ‘आसीदतु’) आप अपने से प्रथम आने वाले—प्राप्त होने वाले गुणों के साथ सूर्यरूप में “अर्यमा-आदित्यः” [निरु॰ ११.१३] आ विराजें।
Essence
परमात्मा स्तुति आमन्त्रण को सुनने में स्वीकार करने में पूर्ण समर्थ और स्वतन्त्र है वह उपासक के हृदय में आता है अग्निरूप में ज्वालाओं के समान वाहक गुणों के साथ, वायुरूप में प्रवाहों के समान प्रेरक गुणों के साथ और सूर्यरूप में प्रातः रश्मियों के समान ज्ञानप्रकाशक गुणों के साथ, वह तेज, बल और ज्ञान का दाता है॥६॥
Special
ऋषिः—प्रस्कण्वः (प्रकृष्ट मेधावी उपासक)॥