Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 490

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रभूवसुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
अ꣡स꣢र्जि꣣ र꣢थ्यो꣣ य꣡था꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢ च꣣꣬म्वोः꣢꣯ सु꣣तः꣢ । का꣡र्ष्म꣢न्वा꣣जी꣡ न्य꣢क्रमीत् ॥४९०॥

अ꣡स꣢꣯र्जि । र꣡थ्यः꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । प꣣वि꣡त्रे꣢ । च꣣म्वोः꣢꣯ । सु꣣तः꣢ । का꣡र्ष्म꣢꣯न् । वा꣣जी꣢ । नि । अ꣣क्रमीत् ॥४९०॥

Mantra without Swara
असर्जि रथ्यो यथा पवित्रे चम्वोः सुतः । कार्ष्मन्वाजी न्यक्रमीत् ॥

असर्जि । रथ्यः । यथा । पवित्रे । चम्वोः । सुतः । कार्ष्मन् । वाजी । नि । अक्रमीत् ॥४९०॥

Samveda - Mantra Number : 490
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(यथा रथ्यः) जैसे रथ में जोड़ने योग्य घोड़ा (असर्जि) साधा जाता है वैसे (चम्वोः) ज्ञान और कर्म में या वैराग्य और अभ्यास में सिद्ध हुआ परमात्मा (कार्ष्मन् पवित्रे सुतः) आकर्षण स्थान हृदय में साक्षात् वह (वाजी-नि-अक्रमीत्) अमृत अन्न भोग वाला परमात्मा प्राप्त होता है।
Essence
जैसे रथ में जोड़ने योग्य घोड़ा उपयुक्त साधनों से साधा जाता है ऐसे अमृत अन्न भोग वाला परमात्मा ज्ञान और कर्म में या वैराग्य और अभ्यास में सिद्ध हुआ आकर्षण स्थान हृदय में साक्षात् प्राप्त होता है॥४॥
Special
ऋषिः—प्रभूवसुः (प्रधान शक्तियों में वसने वाला ज्ञान करने में समर्थ उपासक)॥