Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 489

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- जमदग्निर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
आ꣣विश꣢न्क꣣ल꣡श꣢ꣳ सु꣣तो꣢꣫ विश्वा꣣ अ꣡र्ष꣢न्न꣣भि꣡ श्रियः꣢꣯ । इ꣢न्दु꣣रि꣡न्द्रा꣢य धीयते ॥४८९॥

आ꣣विश꣢न् । आ꣣ । विश꣢न् । क꣣ल꣡श꣢म् । सु꣣तः꣢ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । अ꣡र्ष꣢꣯न् । अ꣣भि । श्रि꣡यः꣢꣯ । इ꣡न्दुः꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । धी꣣यते ॥४८९॥

Mantra without Swara
आविशन्कलशꣳ सुतो विश्वा अर्षन्नभि श्रियः । इन्दुरिन्द्राय धीयते ॥

आविशन् । आ । विशन् । कलशम् । सुतः । विश्वाः । अर्षन् । अभि । श्रियः । इन्दुः । इन्द्राय । धीयते ॥४८९॥

Samveda - Mantra Number : 489
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 6; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सुतः) अभिनिष्पन्न हुआ (इन्दुः) आर्द्र—आनन्दरसभरा शान्तस्वरूप परमात्मा (कलशम्-आविशन्) हृदयकलश को उपासक के हृदय को प्राप्त हुआ (विश्वाः श्रियः) सारी सम्पदाओं को (इन्द्राय) उपासक आत्मा के लिये (अभि-अर्षति) प्रेरित करता है (धीयते) जबकि उपासक के द्वारा वह ध्याया जाता है।
Essence
उपासना द्वारा निष्पन्न शान्तस्वरूप परमात्मा हृदय में जब ध्याया जाता है तो वह समस्त अध्यात्म सम्पदाओं को प्रेरित करता हुआ उपासक को साक्षात् प्राप्त होता है॥३॥
Special
ऋषिः—जमदग्निः (प्रज्वलित—प्रकाशित—प्रत्यक्ष कर लिया परमात्मा अग्नि जिसने ऐसा उपासक)॥