Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 485

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प꣡रि꣢ स्वा꣣ना꣢स꣣ इ꣡न्द꣢वो꣣ म꣡दा꣢य ब꣣र्ह꣡णा꣢ गि꣣रा꣢ । म꣡धो꣢ अर्षन्ति꣣ धा꣡र꣢या ॥४८५॥

प꣡रि꣢꣯ । स्वा꣣ना꣡सः꣢ । इ꣡न्द꣢꣯वः । म꣡दा꣢꣯य । ब꣣र्ह꣡णा꣢ । गि꣣रा꣢ । म꣡धो꣢꣯ । अ꣣र्षन्ति । धा꣡र꣢꣯या ॥४८५॥

Mantra without Swara
परि स्वानास इन्दवो मदाय बर्हणा गिरा । मधो अर्षन्ति धारया ॥

परि । स्वानासः । इन्दवः । मदाय । बर्हणा । गिरा । मधो । अर्षन्ति । धारया ॥४८५॥

Samveda - Mantra Number : 485
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(स्वानासः-इन्दवः) साक्षात् निष्पन्न हुआ शान्त परमात्मा (बर्हणा गिरा) महती स्तुति से (मदाय) हर्ष के लिए (मधोः-परि-अर्षति) मधुरूप धारा से परिप्राप्त होत है। योगाभ्यास द्वारा साक्षात् किए आनन्दधारा से शान्त परमात्मा बड़ी स्तुति से हर्ष के लिए उपासक के अन्दर प्राप्त होता है॥९॥
Special
ऋषिः—असितः काश्यपः (ज्ञानवान् से प्रकाशित अन्तःकरण वाला उपासक)॥