Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 481

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कश्यपो मारीचः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
इ꣡न्दुः꣢ पविष्ट꣣ चे꣡त꣢नः प्रि꣣यः꣡ क꣢वी꣣नां꣢ म꣣तिः꣢ । सृ꣣ज꣡दश्व꣢꣯ꣳ र꣣थी꣡रि꣢व ॥४८१॥

इ꣡न्दुः꣢꣯ । प꣣विष्ट । चे꣡त꣢꣯नः । प्रि꣣यः꣢ । क꣣वीना꣢म् । म꣣तिः꣢ । सृ꣣ज꣢त् । अ꣡श्व꣢꣯म् । र꣣थीः꣢ । इ꣣व ॥४८१॥

Mantra without Swara
इन्दुः पविष्ट चेतनः प्रियः कवीनां मतिः । सृजदश्वꣳ रथीरिव ॥

इन्दुः । पविष्ट । चेतनः । प्रियः । कवीनाम् । मतिः । सृजत् । अश्वम् । रथीः । इव ॥४८१॥

Samveda - Mantra Number : 481
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(चेतनः) चेताने वाला (प्रियः) स्नेही (कवीनां मतिः) मेधावी उपासकों का स्तुत्य (इन्दुः) परमात्मा (रथीः-इव-अश्वम्) रथ स्वामी जैसे घोड़े को (असृजत्) अच्छा बनाता है—साधता है, ऐसे मुझ उपासक को अच्छा बना या उपासना मार्ग पर चला।
Essence
चेताने वाला, स्नेही, मेधावी उपासकों का स्तुति योग्य परमात्मा उपासक को जैसे रथ स्वामी घोड़े को साधता है, चलाता है, ऐसे साधता—सिद्ध बनाता, उपासना मार्ग पर चलाता है॥५॥
Footnote
[*36. “कश्यपः पश्यको भवति” [तै॰ आ॰ १.८.८]।]
Special
ऋषिः—कश्यपः (द्रष्टा*36—सावधान उपासक)॥