Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 480

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
वृ꣢षा꣣ ह्य꣡सि꣢ भा꣣नु꣡ना꣢ द्यु꣣म꣡न्तं꣢ त्वा हवामहे । प꣡व꣢मान स्व꣣र्दृ꣡श꣢म् ॥४८०॥

वृ꣡षा꣢꣯ । हि । अ꣡सि꣢꣯ । भा꣣नुना꣢ । द्यु꣣म꣡न्त꣢म् । त्वा꣣ । हवामहे । प꣡व꣢꣯मान । स्व꣣र्दृ꣡श꣢म् । स्वः꣣ । दृ꣡श꣢꣯म् ॥४८०॥

Mantra without Swara
वृषा ह्यसि भानुना द्युमन्तं त्वा हवामहे । पवमान स्वर्दृशम् ॥

वृषा । हि । असि । भानुना । द्युमन्तम् । त्वा । हवामहे । पवमान । स्वर्दृशम् । स्वः । दृशम् ॥४८०॥

Samveda - Mantra Number : 480
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(पवमान) हे आनन्दधारा में प्राप्त होने वाले परमात्मन्! तू (वृषा हि-असि) सुखवर्षक ही है (भानुना द्युमन्तम्) तेज से तेजस्वी—(त्वा स्वर्दृशम्) तुझ नितान्त सुखदर्शक को (हवामहे) बुलाते हैं।
Essence
हे आनन्दधारा में प्राप्त होने वाले परमात्मन्! तू नितान्त सुखों की वर्षा करने वाला है। अपने तेज से तेजस्वी सुखदर्शक तुझ को हम आमन्त्रित करते हैं॥४॥
Special
ऋषिः—भृगुः (तेजस्वी उपासक)॥