Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 477

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- श्यावाश्वः आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प्र꣡ सोमा꣢꣯सो मद꣣च्यु꣢तः꣣ श्र꣡व꣢से नो म꣣घो꣡ना꣢म् । सु꣣ता꣢ वि꣣द꣡थे꣢ अक्रमुः ॥४७७॥

प्र꣢ । सो꣡मा꣢꣯सः । म꣣दच्यु꣡तः꣢ । म꣣द । च्यु꣡तः꣢꣯ । श्र꣡व꣢꣯से । नः꣣ । मघो꣡ना꣢म् । सु꣣ताः꣢ । वि꣣द꣡थे꣢ । अ꣣क्रमुः ॥४७७॥

Mantra without Swara
प्र सोमासो मदच्युतः श्रवसे नो मघोनाम् । सुता विदथे अक्रमुः ॥

प्र । सोमासः । मदच्युतः । मद । च्युतः । श्रवसे । नः । मघोनाम् । सुताः । विदथे । अक्रमुः ॥४७७॥

Samveda - Mantra Number : 477
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(मदच्युतः) हर्ष चुवाने—वर्षाने वाला (सुताः) उपासित (सोमासः) शान्त आनन्दस्वरूप परमात्मा ‘बहुवचनमादरार्थम्’ (नः-मघोनाम्) हम अध्यात्मयज्ञ वाले उपासकों के “यज्ञेन मघवान् भवति” [तै॰ सं॰ ४.४.८.१] (श्रवसे) श्रवणीय यश के लिये जीवन्मुक्तप्रसिद्ध के लिये “श्रवः श्रवणीयं यशः” [निरु॰ ११.९] (विदथे प्राक्रमुः) आनन्दानुभव स्थान—मोक्ष—में प्राप्त कराते हैं।
Essence
उपासित हुआ—ध्याया हुआ आनन्दवर्षक परमात्मा हम अध्यात्मयज्ञ करने वाले उपासकों के श्रवणीय यश प्रसिद्धि को मुक्त हो आनन्दानुभव स्थान मोक्ष में प्राप्त कराता है॥१॥
Special
ऋषिः—श्यावाश्वः (निर्मल इन्द्रिय घोड़ों वाला उपासक)॥