Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 474

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- दृढच्युत आगस्त्यः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- पावमानं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- पावमानं पर्व
Mantra with Swara
प꣡व꣢स्व दक्ष꣣सा꣡ध꣢नो दे꣣वे꣡भ्यः꣢ पी꣣त꣡ये꣢ हरे । म꣣रु꣡द्भ्यो꣢ वा꣣य꣢वे꣣ म꣡दः꣢ ॥४७४॥

प꣡व꣢꣯स्व । द꣣क्षसा꣡ध꣢नः । द꣣क्ष । सा꣡ध꣢꣯नः । दे꣣वे꣡भ्यः꣢ । पी꣣त꣡ये꣢ । ह꣣रे । मरु꣡द्भ्यः꣢ । वा꣣य꣡वे꣢ । म꣡दः꣢꣯ ॥४७४॥

Mantra without Swara
पवस्व दक्षसाधनो देवेभ्यः पीतये हरे । मरुद्भ्यो वायवे मदः ॥

पवस्व । दक्षसाधनः । दक्ष । साधनः । देवेभ्यः । पीतये । हरे । मरुद्भ्यः । वायवे । मदः ॥४७४॥

Samveda - Mantra Number : 474
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 5; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(हरे) हे दुःखापहरणकर्ता सुखाहरणकर्ता सोम परमात्मन्! तू (दक्षसाधनः) स्वबल साधन वाला है, तुझे अन्य किसी के बल की अपेक्षा नहीं, ऐसा होता हुआ (मदः) हर्षकर हो (देवेभ्यः) जीवन्मुक्तों के लिये (मरुद्भ्यः) मुमुक्षु उपासकों के लिये “मरुतो देवविशः” [श॰ २.५.१.१२] (वा) और (आयवे) साधारण उपासक जन के लिये “आयवः-मनुष्याः” [निघं॰ २.३] (पीतये) तृप्ति हो इसलिये (पवस्व) आनन्दधारा में प्राप्त हो।
Essence
दुःखापहरणकर्ता सुखाहरणकर्ता स्वबल साधन वाला हर्षप्रद परमात्मा जीवन्मुक्तों मुमुक्षुओं साधारण उपासकजनों के लिये आनन्दधारा में प्राप्त होता है॥८॥
Special
ऋषिः—दृढच्युत आगस्त्यः (पाप के त्याग करने वालों में कुशल कठिन पापियों को च्युत करने वाला उपासक)॥