Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 444

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- त्रसदस्युः Chhand- द्विपदा विराट् पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
उ꣡प꣢ प्र꣣क्षे꣡ मधु꣢꣯मति क्षि꣣य꣢न्तः꣣ पु꣡ष्ये꣢म र꣣यिं꣢ धी꣣म꣡हे꣢ त इन्द्र ॥४४४॥

उ꣡प꣢꣯ । प्र꣣क्षे꣢ । प्र꣣ । क्षे꣢ । म꣡धु꣢꣯मति । क्षि꣣य꣡न्तः꣢ । पु꣡ष्ये꣢꣯म । र꣣यि꣢म् । धी꣣म꣡हे꣢ । ते꣣ । इन्द्र ॥४४४॥

Mantra without Swara
उप प्रक्षे मधुमति क्षियन्तः पुष्येम रयिं धीमहे त इन्द्र ॥

उप । प्रक्षे । प्र । क्षे । मधुमति । क्षियन्तः । पुष्येम । रयिम् । धीमहे । ते । इन्द्र ॥४४४॥

Samveda - Mantra Number : 444
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 10;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमात्मन् (मधुमति प्रक्षे) मधुर प्रक्षरण प्रास्रवण—स्तुतिवाणियों के अन्त स्थान मोक्षधाम में “एष उ ह वै वाचोऽन्तो यत् प्रक्षः प्रास्रवणः-यत्रो ह वै वाचोऽन्तः” [जै॰ २.२८८] (उपक्षियन्तः) निवास करते हुए (रयिं पुष्येम) मोक्षधन—मोक्षसुख को पुष्ट करें और (ते धीमहे) तेरा ध्यान करें।
Essence
हे परमात्मन्! स्तुतियों के आधार तेरे मधुर प्रास्रवण करने में हम निवास करते हुए मोक्षधन—भोग को अपने अन्दर पुष्ट करें, सम्भाले, प्राप्त कर लें, अतः तेरा ध्यान करते हैं॥८॥
Special
ऋषिः—सम्पातः (परमात्मा से मेल करने वाला उपासक)॥ देवताः—इन्द्रः (ऐश्वर्यवान् परमात्मा)॥