Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 44

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
यो꣢꣫ विश्वा꣣ द꣡य꣢ते꣣ व꣢सु꣣ हो꣡ता꣢ म꣣न्द्रो꣡ जना꣢꣯नाम् । म꣢धो꣣र्न꣡ पात्रा꣢꣯ प्रथ꣣मा꣡न्य꣢स्मै꣣ प्र꣡ स्तोमा꣢꣯ यन्त्व꣣ग्न꣡ये꣢ ॥४४॥

यः꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯ । द꣡य꣢꣯ते । व꣡सु꣢꣯ । हो꣡ता꣢꣯ । म꣣न्द्रः꣢ । ज꣡ना꣢꣯नाम् । म꣡धोः꣢꣯ । न । पा꣡त्रा꣢꣯ । प्र꣣थमा꣢नि꣢ । अ꣣स्मै । प्र꣢ । स्तो꣡माः꣢꣯ । य꣣न्तु । अग्न꣡ये꣢ ॥४४॥

Mantra without Swara
यो विश्वा दयते वसु होता मन्द्रो जनानाम् । मधोर्न पात्रा प्रथमान्यस्मै प्र स्तोमा यन्त्वग्नये ॥

यः । विश्वा । दयते । वसु । होता । मन्द्रः । जनानाम् । मधोः । न । पात्रा । प्रथमानि । अस्मै । प्र । स्तोमाः । यन्तु । अग्नये ॥४४॥

Samveda - Mantra Number : 44
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(यः-मन्द्रः-होता जनानाम्) जो हर्षित करने वाला दाता “हु दानेऽत्र” परमात्मा जनों के लिये “चतुर्थ्यथे बहुलं छन्दसि” [अष्ट॰ २.३.१२] (विश्वा वसु दयते) समस्त प्रकार के धनों को देता है। (अस्मै-अग्नये) इस परमात्मा के लिये (मधोः-न प्रथमानि पात्रा) मधुर रस के श्रेष्ठ पात्रों के समान (स्तोमाः प्रयन्तु) हमारे स्तुतिवचन हावभाव रस भरे प्राप्त हों।
Essence
परमात्मा हर्षयिता दाता है, उसके दिए सब प्रकार के पदार्थ हैं उदरपूर्ति के लिये अन्न, स्वाद के लिये फल, स्वास्थ्य के लिये ओषधि, सुख लाभ के लिये कपास काष्ठ लोह, भूषार्थ स्वर्णादि और रत्न, पीने-नहाने-धोने को जल, ताप प्रकाशार्थ अग्नि, श्वास लेने को वायु आदि दिए हैं। इनके प्रतीकार में हम केवल हावभाव भरे स्तुति वचन मधुर रस भरे पात्रों के समान उसके लिये दे सकते हैं—देते हैं कृतज्ञता प्रदर्शित करने और सङ्ग लाभ के लिये॥१०॥
Special
ऋषिः—सौभरिः (परमात्मा के गुणों को अपने अन्दर भरने में कुशल उपासक)॥