Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 406

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢धा꣣꣬ ही꣢꣯न्द्र गिर्वण꣣ उ꣡प꣢ त्वा꣣ का꣡म꣢ ई꣣म꣡हे꣢ ससृ꣣ग्म꣡हे꣢ । उ꣣दे꣢व꣣ ग्म꣡न्त꣢ उ꣣द꣡भिः꣢ ॥४०६॥

अ꣡ध꣢꣯ । हि । इ꣣न्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः । उ꣡प꣢꣯ । त्वा꣣ । का꣡मे꣢꣯ । ई꣣म꣡हे꣢ । स꣣सृग्म꣡हे꣢ । उ꣣दा꣢ । इ꣣व । ग्म꣡न्त꣢꣯ । उ꣣द꣡भिः꣢ ॥४०६॥

Mantra without Swara
अधा हीन्द्र गिर्वण उप त्वा काम ईमहे ससृग्महे । उदेव ग्मन्त उदभिः ॥

अध । हि । इन्द्र । गिर्वणः । गिः । वनः । उप । त्वा । कामे । ईमहे । ससृग्महे । उदा । इव । ग्मन्त । उदभिः ॥४०६॥

Samveda - Mantra Number : 406
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(गिर्वणः-इन्द्र) स्तुतियों से वननीय सम्भजनीय परमात्मन्! (अध हि) अब तो (कामे) कामना पूर्ति के निमित्त (त्वा-ईमहे) तुझे चाहते हैं “ईमहे याच्ञाकर्मा” [निघं॰ ३.१९] कि (उपससृग्महे) तुझ से उपसृष्ट हो जावें—वासित हो जावें, (उदा-इव) “उदानि” जल जैसे (उदभिः-ग्मन्ते) जलों से मिल जाते हैं।
Essence
हे स्तुतियों से सेवनीय परमात्मन्! कामनापूर्ति के निमित्त तुझे चाहते हैं। तुझे चाहने से सब कुछ कामना पूरी हो जावेगी, अतः तुझे चाहते हैं। तुझे उपसृष्ट होकर तुझ से मेल करें, जलप्रवाह जैसे जलप्रवाहों से मिलते हैं॥८॥
Special
ऋषिः—नृमेधः (जीवनमुक्त मेधा वाला)॥