Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 404

1875 Mantra
Devata- मरुतः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
गा꣡व꣢श्चिद्घा समन्यवः सजा꣣꣬त्ये꣢꣯न म꣣रु꣢तः꣣ स꣡ब꣢न्धवः । रि꣣ह꣡ते꣢ क꣣कु꣡भो꣢ मि꣣थः꣢ ॥४०४॥

गा꣡वः꣢꣯ । चि꣣त् । घ । समन्यवः । स । मन्यवः । सजात्ये꣢꣯न । स꣣ । जात्ये꣢꣯न । म꣣रु꣡तः꣢ । स꣡ब꣢꣯न्धवः । स । ब꣣न्धवः । रिह꣡ते꣢ । क꣣कु꣡भः꣢ । मि꣣थः꣢ ॥४०४॥

Mantra without Swara
गावश्चिद्घा समन्यवः सजात्येन मरुतः सबन्धवः । रिहते ककुभो मिथः ॥

गावः । चित् । घ । समन्यवः । स । मन्यवः । सजात्येन । स । जात्येन । मरुतः । सबन्धवः । स । बन्धवः । रिहते । ककुभः । मिथः ॥४०४॥

Samveda - Mantra Number : 404
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(मरुतः) परमात्मज्योतिप्रवाह को (गावः-चित्) स्तुति वाणियाँ सारी (समन्यवः) समान आकांक्षा वाली (सबन्धवः) समान एक परमात्मा की ओर (सजात्येन) समान गुणत्व से (ककुभः-मिथः-रिहते) दिशाएँ जैसे परस्पर एक दूसरे को मानो सङ्गत होती हैं।
Essence
परमात्मा को या परमात्मा की ज्ञान ज्योतियों को चाहती हुई स्तुति—वाणियाँ समान गुण वाली होकर समान परमात्मा को या उसकी ज्योतियों को केन्द्र मानकर गति करती हुई परस्पर दिशाओं के समान समागम करने वाली होनी चाहिएँ॥६॥
Special
ऋषिः—सौभरिः (परमात्मस्वरूप को अपने अन्दर भली-भाँति भरण धारण करने से सम्पन्न)॥
देवता—मरुतः ‘इन्द्रसम्बद्धाः’ (परमात्मा से सम्बन्ध रखने वाली पापवासनाओं को मारने वाली ज्ञान ज्योति प्रवाह)॥