Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 403

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
त्व꣡या꣢ ह स्विद्यु꣣जा꣢ व꣣यं꣡ प्रति꣢꣯ श्व꣣स꣡न्तं꣢ वृषभ ब्रुवीमहि । स꣣ꣳस्थे꣡ जन꣢꣯स्य꣣ गो꣡म꣢तः ॥४०३॥

त्व꣡या꣢꣯ । ह꣣ । स्वित् । युजा꣢ । व꣣य꣢म् । प्र꣡ति꣢꣯ । श्व꣣स꣡न्त꣢म् । वृ꣣षभ । ब्रुवीमहि । सँस्थे꣢ । स꣣म् । स्थे꣢ । ज꣡न꣢꣯स्य । गो꣡म꣢꣯तः ॥४०३॥

Mantra without Swara
त्वया ह स्विद्युजा वयं प्रति श्वसन्तं वृषभ ब्रुवीमहि । सꣳस्थे जनस्य गोमतः ॥

त्वया । ह । स्वित् । युजा । वयम् । प्रति । श्वसन्तम् । वृषभ । ब्रुवीमहि । सँस्थे । सम् । स्थे । जनस्य । गोमतः ॥४०३॥

Samveda - Mantra Number : 403
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(वृषभ) हे सुखवर्षक परमात्मन्! (त्वया युजा स्वित्-ह) निश्चित तुझ से युक्त होने वाले के साथ ही (श्वसन्तं प्रति ब्रुवीमहि) श्वास लेते हुए जैसे प्रबल पाप का प्रतिवाद करते हैं (गोमतः-जनस्य संस्थे) स्तुति वाणी वाले जन के संस्थान—ध्यान में बैठकर।
Essence
स्तुति करने वाले उपासक के ध्यानासन पर बैठ ध्यान जमाकर तेरे से योग कर प्रबल पाप का भी प्रतिवाद प्रतीकार कर सकते हैं, अतः परमात्मा का ध्यान करना चाहिए॥५॥
Special
ऋषिः—सौभरिः (परमात्मस्वरूप को अपने अन्दर भली-भाँति भरण धारण करने से सम्पन्न)॥