Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 400

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- सौभरि: काण्व: Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
यो꣡ न꣢ इ꣣द꣡मि꣢दं पु꣣रा꣡ प्र वस्य꣢꣯ आनि꣣ना꣢य त꣡मु꣢ व स्तुषे । स꣡खा꣢य꣣ इ꣡न्द्र꣢मू꣣त꣡ये꣢ ॥४००॥

यः꣢ । नः꣢ । इद꣡मि꣢दम् । इ꣣द꣢म् । इ꣣दम् । पुरा꣢ । प्र । व꣡स्यः꣢꣯ । आ꣣नि꣡नाय꣢ । आ꣣ । निना꣡य꣢ । तम् । उ꣣ । वः । स्तुषे । स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । इ꣡न्द्र꣢꣯म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ ॥४००॥

Mantra without Swara
यो न इदमिदं पुरा प्र वस्य आनिनाय तमु व स्तुषे । सखाय इन्द्रमूतये ॥

यः । नः । इदमिदम् । इदम् । इदम् । पुरा । प्र । वस्यः । आनिनाय । आ । निनाय । तम् । उ । वः । स्तुषे । सखायः । स । खायः । इन्द्रम् । ऊतये ॥४००॥

Samveda - Mantra Number : 400
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 2;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 6;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(यः) जो (नः) हमारे लिए (वः) तुम्हारे लिये (पुरा) पुरातन—सनातन काल से (इदम्-इदं-वस्यः) इस इस—एक दूसरे से भिन्न-भिन्न वसु—वसने योग्य शरीर और भोग्य वस्तु (प्र-आनिनाय) प्राप्त कराता है (तम्-इदम्-उ) उस ऐश्वर्यवान् परमात्मा को अवश्य (ऊतये) रक्षा कृपा के लिये (सखायः) हे सहयोगियो! (स्तुषे) ‘स्तुवीमहि’ स्तुति करो।
Essence
हे सहयोगी जनो! जो परमात्मा तुम और हम उपासकों के लिये पुराकाल से यह यह एक दूसरे से भिन्न-भिन्न पुनः पुनः विशिष्ट वसने योग्य शरीर और भोग्य वस्तु प्राप्त कराता है हम सब रक्षा कृपा के लिये उसकी स्तुति करें॥२॥
Special
ऋषिः—सौभरिः (परमात्मस्वरूप को अपने अन्दर भली-भाँति भरण धारण करने से सम्पन्न)॥