Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 390

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- विश्वमना वैयश्वः Chhand- उष्णिक् Swara- ऋषभः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣡खा꣢य꣣ आ꣡ शि꣢षामहे꣣ ब्र꣡ह्मेन्द्रा꣢꣯य व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣ष꣢ ऊ꣣ षु꣢ वो꣣ नृ꣡त꣢माय धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

स꣡खा꣢꣯यः । स । खा꣣यः । आ꣢ । शि꣣षामहे । ब्र꣡ह्म꣢꣯ । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । व꣣ज्रि꣡णे꣢ । स्तु꣣षे । उ꣣ । सु꣢ । वः꣣ । नृ꣡त꣢꣯माय । धृ꣣ष्ण꣡वे꣢ ॥३९०॥

Mantra without Swara
सखाय आ शिषामहे ब्रह्मेन्द्राय वज्रिणे । स्तुष ऊ षु वो नृतमाय धृष्णवे ॥

सखायः । स । खायः । आ । शिषामहे । ब्रह्म । इन्द्राय । वज्रिणे । स्तुषे । उ । सु । वः । नृतमाय । धृष्णवे ॥३९०॥

Samveda - Mantra Number : 390
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(सखायः) हे उपासक बन्धुओ! (वः) ‘यूयम्’ तुम और हम (वज्रिणे) ओजस्वी—(धृष्णवे) पापविचारधर्षणशील—(नृतमाय) ऊँचे नेता—(इन्द्राय) ऐश्वर्यवान् परमात्मा के लिए (ब्रह्म-आशिषामहे) ब्रह्म—मन समर्पित करते हैं “मनो ब्रह्मेति व्यजानात्” [तै॰ आ॰ ९.४.१०] अतः हम (ऊ षु) अवश्य (स्तुषे) उसे स्तुत करते हैं।
Essence
परमात्मा के उपासको! उस ओजस्वी परमात्मदेव को सदा—अपना मन समर्पण करते रहें। वह हमारा सच्चा नेता, विरोधी पापभाव का धर्षणशील है॥१०॥
Special
ऋषिः—विश्वमनाः (सबमें मन रखने वाला उदार—एकपक्ष वाला नहीं—समदर्शी जन)॥