Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 365

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
स꣢ घा꣣ य꣡स्ते꣢ दि꣣वो꣡ नरो꣢꣯ धि꣣या꣡ मर्त꣢꣯स्य꣣ श꣡म꣢तः । ऊ꣣ती꣡ स बृ꣢꣯ह꣣तो꣢ दि꣣वो꣢ द्वि꣣षो꣢꣫ अꣳहो꣣ न꣡ त꣢रति ॥३६५॥

सः꣢ । घ꣣ । यः꣢ । ते꣣ । दिवः꣢ । न꣡रः꣢꣯ । धि꣣या꣢ । म꣡र्त꣢꣯स्य । श꣡म꣢꣯तः । ऊ꣣ती꣢ । सः । बृ꣣हतः꣢ । दि꣣वः꣢ । द्वि꣣षः꣢ । अँ꣡हः꣢꣯ । न । त꣣रति ॥३६५॥

Mantra without Swara
स घा यस्ते दिवो नरो धिया मर्तस्य शमतः । ऊती स बृहतो दिवो द्विषो अꣳहो न तरति ॥

सः । घ । यः । ते । दिवः । नरः । धिया । मर्तस्य । शमतः । ऊती । सः । बृहतः । दिवः । द्विषः । अँहः । न । तरति ॥३६५॥

Samveda - Mantra Number : 365
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(ते दिवः-नरः-शमतः-अमर्तस्य) तुझ अमृतलोक—मोक्षधाम के नेता शान्ति देते हुए अमर देव का (यः-धिया सघा) “सघा सखा वर्णव्यत्ययः” जो ध्यान द्वारा सखा हो जाता है (सः) वह (ऊती) तेरी रक्षा से (बृहतः-दिवः) उस महान् मोक्षधाम के (द्विषः) विरोधी विघ्नों बाधकों को (अंहः-न तरति) संसार के साधारण पाप के समान तर जाता है।
Essence
मोक्षधाम के नायक तथा उपासकों को शान्ति सुख के दाता अमरदेव परमात्मा का जो ध्यानोपासना से सखा—मित्र बन जाता है वह उसकी रक्षा से कृपा से महान् मोक्षधाम के विरोधियों को साधारण विघ्न के समान पार कर जाता है॥६॥
Special
ऋषिः—भरद्वाजः (अध्यात्म योग को अपने में भरण करने वाला जन)॥