Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 29

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- गोपवन आत्रेयः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
तं꣡ त्वा꣢ गो꣣प꣡व꣢नो गि꣣रा꣡ जनि꣢꣯ष्ठदग्ने अङ्गिरः । स꣡ पा꣢वक श्रुधी꣣ ह꣡व꣢म् ॥२९॥

त꣢म् । त्वा꣣ । गो꣣प꣡व꣢नः । गि꣣रा꣢ । ज꣡नि꣢꣯ष्ठत् । अ꣣ग्ने । अङ्गिरः । सः꣢ । पा꣣वक । श्रुधी । ह꣡व꣢꣯म् ॥२९॥

Mantra without Swara
तं त्वा गोपवनो गिरा जनिष्ठदग्ने अङ्गिरः । स पावक श्रुधी हवम् ॥

तम् । त्वा । गोपवनः । गिरा । जनिष्ठत् । अग्ने । अङ्गिरः । सः । पावक । श्रुधी । हवम् ॥२९॥

Samveda - Mantra Number : 29
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अङ्गिरः पावक-अग्ने) हे अङ्गों को सन्मार्ग में प्रेरित करने वाले पवित्रकारक ज्ञानप्रकाशस्वरूप परमात्मन्! (तं त्वा) उस तुझ को (गोपवनः) अपनी इन्द्रियों को पवित्र करने वाला जन (गिरा जनिष्ठत्) स्तुति से अपने अन्दर प्रसिद्ध करता है—साक्षात् करता है (सः-हवं श्रुधि) वह तू हमारे ह्वान-पुकार को सुन।
Essence
परमात्मन्! पवित्र करने वाला तथा अपने उपासक की भीतरी अभ्यर्थना को सुनने वाला है तथा उपासक के अन्दर साक्षात् हो जाता है पुनः इन्द्रियों में संयम शक्ति प्राप्त कर उनकी अशान्ति से छूट जाता है। परमात्मा का कृपापात्र बन जाता है॥९॥
Special
ऋषिः—गोपवनः (गौओं—इन्द्रियों को पवित्र करने रखने वाला संयमी उपासक)॥