Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 271

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथि0मेध्यातिथी काण्वौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
क्वे꣢꣯यथ꣣ क्वे꣡द꣢सि पुरु꣣त्रा꣢ चि꣣द्धि꣢ ते꣣ म꣡नः꣢ । अ꣡ल꣢र्षि युध्म खजकृत्पुरन्दर꣣ प्र꣡ गा꣢य꣣त्रा꣡ अ꣢गासिषुः ॥२७१॥

क्व꣢꣯ । इ꣣यथ । क्व꣢꣯ इत् । अ꣣सि । पुरुत्रा꣢ । चि꣣त् । हि꣢ । ते꣣ । म꣡नः꣢꣯ । अ꣡ल꣢꣯र्षि । यु꣣ध्म । खजकृत् । खज । कृत् । पुरन्दर । पुरम् । दर । प्र꣢ । गा꣣यत्राः꣢ । अ꣣गासिषुः ॥२७१॥

Mantra without Swara
क्वेयथ क्वेदसि पुरुत्रा चिद्धि ते मनः । अलर्षि युध्म खजकृत्पुरन्दर प्र गायत्रा अगासिषुः ॥

क्व । इयथ । क्व इत् । असि । पुरुत्रा । चित् । हि । ते । मनः । अलर्षि । युध्म । खजकृत् । खज । कृत् । पुरन्दर । पुरम् । दर । प्र । गायत्राः । अगासिषुः ॥२७१॥

Samveda - Mantra Number : 271
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 3;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 4;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(युध्म खजकृत्-पुरन्दर) हे पापों से संग्राम करने वाले “खजे संग्राम नाम” [निघं॰ २.१७] योद्धा पाप शरीरों को विदीर्ण करने वाले परमात्मन् “आत्मा वै पूः” [श॰ ७.५.१.२] तू (पुरुत्रा) बहुत उपासक जनों में “देवमनुष्य-पुरुषपुरुमर्त्येभ्यो द्वितीयासप्तम्योर्बहुलम्” [अष्टा॰ ५.४.५६] ‘त्रा’ (ते चित् हि-मनः) तेरे लिये ही निरन्तर मन है (क्व-इयथ क्व-इत्-असि) कि तू कहाँ गया था, कहा हैं? (अलर्षि) तू आ (गायत्रा प्र-अगासिषुः) उपासक लोग प्रकृष्ट स्तुति गान गाते हैं।
Essence
हे पापों से संग्राम करने वाले योद्धा! पापात्माओं पाप शरीरों को विदीर्ण करने वाले परमात्मन्! बहुत उपासकों में तेरे दर्शन के लिये मन लगा हुआ है कि तू कहां गया? कहाँ है? तू आ जा। वे ऐसे गुणगानों को प्रकृष्ट गाते हैं॥९॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिर्मेध्यातिथिश्च (मेधा से गमन प्रवेश करने वाला और पवित्र गुणों में गमन शील)॥