Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 250

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा काण्वः Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣मा꣡ उ꣢ त्वा पुरूवसो꣣ गि꣡रो꣢ वर्धन्तु꣣ या꣡ मम꣢꣯ । पा꣣वक꣡व꣢र्णाः꣣ शु꣡च꣢यो विप꣣श्चि꣢तो꣣ऽभि꣡ स्तोमै꣢꣯रनूषत ॥२५०॥

इ꣣माः꣢ । उ꣣ । त्वा । पुरूवसो । पुरु । वसो । गि꣡रः꣢꣯ । व꣣र्धन्तु । याः꣢ । म꣡म꣢꣯ । पा꣣वक꣡व꣢र्णाः । पा꣣वक꣢ । व꣣र्णाः । शु꣡च꣢꣯यः । वि꣣पश्चि꣡तः꣢ । वि꣣पः । चि꣡तः꣢꣯ । अ꣣भि꣢ । स्तो꣡मैः꣢꣯ । अ꣣नूषत ॥२५०॥

Mantra without Swara
इमा उ त्वा पुरूवसो गिरो वर्धन्तु या मम । पावकवर्णाः शुचयो विपश्चितोऽभि स्तोमैरनूषत ॥

इमाः । उ । त्वा । पुरूवसो । पुरु । वसो । गिरः । वर्धन्तु । याः । मम । पावकवर्णाः । पावक । वर्णाः । शुचयः । विपश्चितः । विपः । चितः । अभि । स्तोमैः । अनूषत ॥२५०॥

Samveda - Mantra Number : 250
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(पुरूवसो) हे बहुत गुण रूप से हमारे अन्दर वसने तथा अपने अन्दर वसाने वाले परमात्मन्! (याः-इमाः-उ गिरः) जो ये प्रस्तुत स्तुतियाँ “स्तुतयो गिरः” [निरु॰ १.११] (त्वा) तेरे प्रति समर्पित हैं वे (मम वर्धन्तु) ‘अस्मान्’ “विभक्तिवचनव्यत्ययः” [निरु॰ १.११] अतः सहयोगी (पावकवर्णाः) अग्निवर्ण वाले तेजस्वी (शुचयः) पवित्र (विपश्चितः) मेधावी उपासको! “विपश्चितः—मेधाविनः” [निघं॰ ३.१५] (स्तोमैः) स्तुति समूहों से (अभ्यनूषत) पुनः पुनः स्तुत करो—परमात्मा की स्तुति करो।
Essence
परमात्मन्! ये स्तुतियाँ जो तेरे प्रति समर्पित की जा रही है हमें बढ़ावें ऊँचे स्तर पर ले जावें—ले जाती हैं अतः मेरे साथी तेजस्वी पवित्र मेधावी उपासको! तुम उसकी स्तुति करो॥८॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिः—(पवित्र गुणों में अतन गमन प्रवेश करने वाला उपासक)॥