Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 245

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मेधातिथि0मेध्यातिथी काण्वौ Chhand- बृहती Swara- मध्यमः Kaand Name- ऐन्द्रं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- ऐन्द्रं पर्व
Mantra with Swara
आ꣡ त्वा꣢ स꣣ह꣢स्र꣣मा꣢ श꣣तं꣢ यु꣣क्ता꣡ रथे꣢꣯ हिर꣣ण्य꣡ये꣢ । ब्र꣣ह्म꣢युजो꣣ ह꣡र꣢य इन्द्र के꣣शि꣢नो꣣ व꣡ह꣢न्तु꣣ सो꣡म꣢पीतये ॥२४५॥

आ꣢ । त्वा꣣ । सह꣡स्र꣢म् । आ । श꣣त꣢म् । यु꣢क्ताः꣢ । र꣡थे꣢꣯ । हि꣣रण्य꣡ये꣢ । ब्र꣣ह्मयु꣡जः꣢ । ब्र꣣ह्म । यु꣡जः꣢꣯ । ह꣡र꣢꣯यः । इ꣣न्द्र । केशि꣡नः꣢ । व꣡ह꣢꣯न्तु । सो꣡म꣢꣯पीतये । सो꣡म꣢꣯ । पी꣣तये ॥२४५॥

Mantra without Swara
आ त्वा सहस्रमा शतं युक्ता रथे हिरण्यये । ब्रह्मयुजो हरय इन्द्र केशिनो वहन्तु सोमपीतये ॥

आ । त्वा । सहस्रम् । आ । शतम् । युक्ताः । रथे । हिरण्यये । ब्रह्मयुजः । ब्रह्म । युजः । हरयः । इन्द्र । केशिनः । वहन्तु । सोमपीतये । सोम । पीतये ॥२४५॥

Samveda - Mantra Number : 245
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्र) हे परमात्मन्! (हिरण्यये रथे) अमृतरूप रमणीय महान् मोक्षस्वरूप में “अमृतं वै हिरण्यम्” [तै॰ ६.२.७.२] “तदिदास भुवनेषु ज्येष्ठमिति रथस्य हैतद्रूपम्” [जै॰ २.१२] (युक्ताः) युक्त (ब्रह्मयुजः) तुझ परमात्मा से योग मेल कराने वाले (केशिनः) ज्ञान ज्योति वाले “केशः काशनाद्वा प्रकाशनाद्वा” [निरु॰ १२.२६] (हरयः) तुझे लाने वाले हमें ले जाने वाले गुणस्वरूप (शतं सहस्रम्) सौ एवं सहस्र बहुत—बहुत असंख्य (त्वा) तुझे (सोमपीतये) हमारे उपासनारस के पान—स्वीकार करने के लिये (आ-वहन्तु) लावें शीघ्र लावें।
Essence
परमात्मा के अमृत मोक्षधाम में वर्तमान उसके ज्योतिर्मय गुण स्वरूप सैकड़ों सहस्रों हैं जो हमें ब्रह्म से योग कराने वाले हैं वे परमात्मा को हम तक लाने वाले और हमें परमात्मा तक ले जाने वाले हैं वे हमारे उपासनारस को पान कराने स्वीकार कराने के लिये हमारे तक पहुँचावें॥३॥
Special
ऋषिः—मेधातिथिर्मेध्यातिथिर्वा (मेधा से अतन—गमन प्रवेशशील या पवित्र परमात्मा में अतन—गमन प्रवेशशील)॥